बिहार में पुल गिरने का सिलसिला जारी है। पिछले कुछ दिनों में ही, प्रदेश में 17 दिनों में 12 पुल गिर चुके हैं। ऐसे में सवाल है कि आखिर वहां इतने जल्दी पुल क्यों गिर रहे हैं और भारत में पुलों का इतिहास कैसा रहा है?

बता दें कि, बिहार से पिछले कुछ दिनों में एक खबर बार-बार आ रही है और वो है पुल गिरने की न्यूज। दरअसल, बिहार में पिछले 18 दिनों में 12 पुल गिर चुके हैं। इस साल बिहार में पुल गिरने का सिलसिला 18 जून से शुरू हुआ था, जब सबसे पहले अररिया जिले के सिकटी प्रखंड में एक पुल गिरा था। इसके बाद पुल गिरने का सिलसिला शुरू हो गया और एक पखवाड़े में करीब 10 पुल गिर गए। अगर छोटे मोटे पुलों को मिलाकर देखें तो 3 जुलाई को तो एक दिन में ही पांच पुल गिर गए। वैसे ऐसा नहीं है कि इस बार कुछ अलग है और पुल गिर रहे हैं। दरअसल, भारत में पुल गिरने का सिलसिला लंबे समय से जारी है और हर साल बड़ी संख्या में कई पुल गिर जाते हैं। ऐसे में आज जानने की कोशिश करते हैं कि, भारत में कुछ सालों में पुल गिरने का ट्रैक रिकॉर्ड कैसा रहा है और किस वजह से पुल गिरने की घटनाएं होती रहती हैं।
भारत में कितने पुल गिरे?
बता दें कि, पूरे भारत का रिकॉर्ड देखा जाए तो एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 1977 से 2017 के बीच 2130 पुल गिर चुके हैं। (इस आंकड़े में नाले और फुटओवर ब्रिज शामिल नहीं है)। इस रिसर्च के हिसाब से भारत में पुल की औसत आयु 34.5 साल है। वहीं, पिछले कुछ सालों में पुल गिरने की घटनाओं पर नजर डाले तो फैक्टली की एक रिपोर्ट में एनसीआरबी के डेटा के हिसाब से बताया गया है कि साल 2012 से 2021 के बीच 214 पुल गिरने के मामले दर्ज हुए हैं। हालांकि एनसीआरबी के आंकड़े यह भी बताते हैं कि, देश भर में पुलों के गिरने की घटनाओं में कमी आई है। क्योंकि 2012-2013 में पुल गिरने की घटनाएं औसतन 45 थीं, जो 2021 में घटकर आठ हो गईं।
पूल हादसों में कितने लोगों की हुई मौत?
बता दें कि, पुल गिरने से हर साल कई लोगों की मौत हो जाती है। साल 2012 से 2021 तक पुल गिरने से 285 लोगों की मौत हो गई थी। इसमें साल 2012 में 62, 2013 में 53, 2014 में 12, 2015 में 24, 2016 में 47, 2017 में 10, 2018 में 34, 2019 में 26, 2020 में 10, 2021 में 5 लोगों की मौत हो गई थी। साल 2022 में गुजरात के मोरबी में एक पुल गिरने का हादसा हुआ था, जब मच्छु नदी में बने पूल के टूटने से 141 लोगों की मौत हो गई थी।
आखिर क्यों गिर रहे हैं पुल।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, पुल गिरने के कई कारण हो सकते हैं। इन कारणों में पुल का डिजाइन, पुल बनाने में इस्तेमाल हुआ खराब सामान, लापरवाही, उम्रदराज पुल आदि शामिल है, इसके अलावा प्राकृतिक आपदा भी पुल गिरने की अहम वजह है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 80.30 पुल गिरने की घटनाएं प्राकृतिक आपदाओं की वजह से होती है। इसके बाद 10.10 फीसदी घटनाएं खराब मैटेरियल, 3.28 फीसदी ब्रिज ओवरलोडिंग और 2.19 फीसदी ह्यूमन मेड डिजास्टर्स की वजह से होती है। साथ ही बालू खनन भी पुल गिरने के प्रमुख कारणों में से एक है।
सवाल है कि बिहार की मौजूदा सरकार, अपने जिस सुशासन के दावे अक्सर करती रहती है। उसमें लगातार पुलों के ढहने को कैसे देखा जाए। कुछ वर्ष पहले बने या फिर निर्माणाधीन पुल अगर इस तरह गिर गए, तो इसके पीछे घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार के अलावा और क्या वजह हो सकती है? विडंबना है कि जहां पुलों के लगातार ढहने की जांच कर जरूरी कार्रवाई की जाती, बाकी पुलों के रखरखाव और नए पुलों के निर्माण में भ्रष्टाचार खत्म करके उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती, वहीं इस मसले पर नाहक ही सियासी बयानबाजियां शुरू हो गईं। ढह गए पुलों की जिम्मेदारी पर सियासत करना, क्या इस समस्या का समाधान है?