समय बर्बाद करना हो तो देखें मिर्जापुर सीजन-3

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मिर्जापुर सीजन 3 रिव्यू
मुन्ना भैया के साथ ‘मिर्जापुर 3’ को भी जलाकर कर दिया खाक, सीजन 3 के नाम पर जो बवासीर परोसी, उसके बाद तो हो गई ऐसी-तैसी। अमेजन प्राइम वीडियो पर 5 जुलाई से स्ट्रीम हो रही ‘मिर्जापुर 3’ मैंने भी देखी। बता दें कि, मैंने 10 एपिसोड देखने के लिए हिम्मत जुटाई। क्योंकि 45 से 50 मिनट का है एक एपिसोड। मैंने देखा और फिर देखने के बाद, जो हाल बेहाल हुआ। उससे सिर्फ मन ही खराब हुआ। क्योंकि बीते दो सीजन के बाद मेकर्स ने जो तीसरे सीजन में रायता फैलाया है, वो वाकई महाबकवास है, एकदम बवासीर।
 
बता दें कि, भौकाल, पावर, इज्जत, कंट्रोल… ‘मिर्जापुर’ के बाहुबलियों को बस यही चाहिए। मगर दर्शकों को क्या चाहिए? यह कभी सोचा है आपने? पहला सीजन बवाल, दूसरा सीजन भी बवाल, लेकिन तीसरा सीजन देखकर तो लगा- ये क्या बकवास है। मतलब क्या किया है इस बार मेकर्स ने? वैसे बात बिल्कुल सत्य कही गई है, नेम-फेम पाकर कुछ लोग बौरा जाते हैं। वही हाल हुआ है इस बार ‘मिर्जापुर सीजन 3’ के मेकर्स के साथ। 10 एपिसोड की इस सीरीज को देखने के लिए समय निकाला। देखकर एकदम से मन खराब हो गया। कसम से क्या ही बवासीर था ये सीजन?
 
अविनाश सिंह तोमर की लिखी और गुरमीत सिंह की डायरेक्टेड सीरीज ‘मिर्जापुर 3’ को लेकर बहुत इंतजार किया। मैंने ही नहीं! देश के उन तमाम लोगों ने, जिन्होंने इसे देखा और पिछले दो सीजन्स को खूब प्यार दिया था। लेकिन मिला क्या? कहा जाता है कि सब्र का फल मीठा होता है लेकिन ये तो इतना कड़वा निकला कि उल्टी करने का मन हो गया। मिर्जापुर सीरीज में सबसे अहम जो थे वो कालीन भैया ही थे। लेकिन उन्हें ही टट्टू बना दिया। उनसे ज्यादा तो कुलभूषण खरबंदा ने दो सीजन में काम किया था। मगर मेकर्स ने इस बार पंकज त्रिपाठी को एकदम गूंगी गुड़िया ही बना दिया। और मुन्ना भैया को तो पिछले ही सीजन में मारकर, इस सीजन में जला दिया। मुन्ना भैया के मारने के साथ ही मर गयी दर्शकों की मनोरंजक उम्मीदें।
 

मिर्जापुर सीजन 3 में कालीन भैया फुस्स और गुड्डू भैया सुस्त

 
एक ही बात कहेंगे- मिर्जापुर सीजन 3 में कालीन भैया फुस्स और गुड्डू भैया सुस्त। बता दें कि, एक तरफ गुड्डू पंडित को गद्दी चाहिए लेकिन कोई भौकाल नहीं। दूसरे तरफ इसके उल्टा, अंत में गुड्डू पंडित की गोलू संग आशिकी दिखा दी गई, जिसको देखने के बाद तो माथा ही पीट लिया। शुरू से लेकर अंत तक यही लगा कि अब कालीन भैया जागेंगे और आएंगे। अब जागेंगें और गर्दा उड़ाएंगे। मगर सीजन-3 में कालीन भैया तो अपने बाबूजी से भी गए गुजरे हो गए। और अंत में जब तक जागे, तब तक तो सीरीज ही खत्म हो गई। इतना ही नहीं! एक सज्जन आदमी के रूप में रॉबिन दिखे, जिसकी मौत इतनी बेरहमी से दिखाई गई कि, क्या बताएं? मुन्ना भैया की कसम, स्क्रीन पर ही उल्टी हो जाएगी।
 

सीजन 3 में मिर्जापुर’ की क्वीन्स भी पड़ गईं फीकी

 
चाहें बीना त्रिपाठी, राधिया, माधुरी यादव, डिंपी या जरीना… इन सभी किरदारों ने भी इस बार खूब निराश किया। सीजन 2 के बाद, जैसे लगा था कि इस बार तो ये कुछ अलग करेंगी। मगर सीजन 2 के मुकाबले सीजन 3 में भी कुछ खास नहीं किया। आखिर मेकर्स चाहते क्या थे? ये तो वो ही जाने, क्योंकि उन्होंने बस खानापूर्ती की है। अब हास्यास्पद देखिए, जिसने लाला को मरवाया, उस शरद शुक्ला को अंत में ही टपका दिया गया। तो भइया, चौथे सीजन में क्या अब क्या सिर्फ हम कालीन वर्सेस गुड्डू का ही जंग देखेंगे?
 
खैर छोड़िए! हम बस इतना कहना चाहते हैं कि जितना कला का प्रदर्शन करना था, आपने कर लिया। जो बीरबल की खिचड़ी तीसरे सीजन के नाम पर पकाई गई है, उसे दर्शकों को तो परोसकर पेट खराब कर दिया है। अब आशा करते हैं कि आप चौथा सीजन, चौथा जैसा ही रखिएगा, अर्थात एकदम छोटा। और उसके बाद हाथ जोड़ रहे हैं, पांचवे की कोई उम्मीद मत दीजिएगा क्योंकि इस बार आपने करोड़ों लोगों को निराश किया है, जिसके बाद चौथे के लिए ज्यादा क्रेज बचा नहीं है। हिंसा और अश्लीलता तो आप इस सीरीज में भर-भरकर परोसते ही हैं। बस इतनी दया करिएगा कि पांचवे सीजन की नौबत न आए। ये तो रही एक दर्शक के तौर पर हमारे विचार, नमस्कार मैं विश्वजीत कुमार। अब जल्दी-जल्दी से मिर्जापुर 3 को लेकर आपसभी, अपने विचार भी कमेंट बॉक्स में पटकिये।
 

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