South Film Industry हुई बंद, नहीं बनेंगी नई फिल्में।

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तमिल फिल्म निर्माता संघ
जिस तरह से विगत कुछ वर्षों में साउथ की फिल्मों का क्रेज़ बढ़ा है। बड़े पैमाने पर लोग दक्षिण भारत की फिल्मों के आने का इंतज़ार करते हैं। इसी बीच साउथ मूवी फैंस के लिए एक बुरी खबर है। जी हाँ! 01 नवंबर 2024 से तमिल फिल्‍म इंडस्‍ट्री पर लगेगा ताला।
 
खबरों के खिलाड़ी। तमिल फिल्म निर्माता एसोस‍िएशन ने लिया फिलहाल में कोई नई मूवी नहीं बनाने का बड़ा फैसला। तमिल फिल्‍म निर्माता एसोस‍िएशन की बैठक में निर्णय लिया गया है कि, आगामी 01 नवंबर 2024 से फिलहाल किसी नई फिल्‍म पर काम नहीं होगा। इसके साथ ही एक्‍टर्स और टेक्‍नीश‍ियन पर लगाम लगाते हुए उन्‍हें पुराने प्रोजेक्‍ट्स को पहले पूरा करने के लिए भी कहा गया है। यह फैसला तमिल फिल्‍म निर्माता एसोस‍िएशन की बैठक में सर्वसम्‍मत‍ि से लिया गया। मीटिंग में आया एक्‍टर धनुष का नाम, अभिनेता धनुष द्वारा कई प्रोजेक्‍ट्स के लिए एकसाथ एडवांस लेने का है मामला। बुरी खबर है कि, अब बिना एसोस‍िएशन की रजामंदी के नई फिल्‍म नहीं शुरू करेंगे प्रोड्यूसर्स।
 

आखिर क्यों नहीं बनेगी साउथ की नई फिल्में और तमिल फिल्म एसोसिएशन की बैठक में क्या-क्या बने नए नियम?

 
बता दें कि वर्ष 2024 की पहली छमाही, अर्थात जनवरी से जून का महीना फिल्‍म इंडस्‍ट्री के लिए अच्‍छी नहीं रही है। कुछ गिने-चुने फिल्‍मों के अलावा बॉलीवुड से लेकर साउथ तक, एक के बाद एक, बड़ी से बड़ी फिल्‍में फ्लॉप साबित हुई हैं। दूसरी ओर, OTT के बढ़ते क्रेज को देखते हुए कई फिल्‍में सिनेमाघरों में रिलीज के कुछ ही हफ्तों बाद, स्‍ट्रीमिंग प्‍लेटफॉर्म्‍स पर उपलब्‍ध हो रही हैं। जाहिर तौर पर फिल्मों को लेकर दर्शकों का रुझान बदला है और यही फिल्‍म एग्‍जीबिटर्स और इंडस्‍ट्री दोनों के लिए चिंता का विषय भी है। तमिल फिल्‍म निर्माता एसोससियन अर्थात TFPC की हालिया बैठक में, इन सभी बातों पर विशेष चर्चा हुई। चर्चा इस बात भी हुई कि, घाटे के इस दौर में एक्‍टर्स और क्रू-मेंबर्स के बकाया पैसों का भी भुगतान हो। लेकिन इस बैठक में एक ऐसा निर्णय लिया गया है, जो फैंस को चौंकाने के साथ निराश कर सकता है। एसोसिएशन के निर्णय में कहा गया है कि 01 नवंबर से सभी शूटिंग्‍स पर रोक लगा दी जाए।
 
तमिल फ‍िल्‍म निर्माता एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित यह बैठक चेन्नई में हुई। इसमें तमिलनाडु थिएटर ओनर्स एसोसिएशन, तमिलनाडु मल्टीप्लेक्स ओनर्स एसोसिएशन और तमिलनाडु फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर्स सहित इंडस्‍ट्री के कई लोग और कार्यकारी सदस्य मौजूद थे। चर्चा के बाद एसोसिएशन ने चिंताओं से निपटने के लिए छह समाधान सुझाए हैं। तो आईये जानते हैं ये 06 समाधान कौन-कौन से हैं, जिनका निर्णय बैठक में लिया गया।
 
इस बैठक में सभी की सहमति से यह फैसला लिया गया है कि, किसी भी बड़े स्‍टार की फिल्‍म को सिनेमाघरों में रिलीज के 8 हफ्ते अर्थात 02 महीने बाद ही OTT पर रिलीज किया जाए। बैठक में यह मामला भी आया कि कुछ एक्‍टर और टेक्‍नीश‍ियन कुछ प्रोडक्शन कंपनियों से एडवांस लेने के बाद, दूसरी प्रोडक्शन कंपनियों के लिए काम करने चले जाते हैं। इससे भारी नुकसान होता है। इसलिए, बेहतर होगा कि किसी नए प्रोजेक्‍ट पर काम करने से पहले एक्‍टर या टेक्‍नीश‍ियन अपने पुराने प्रोजेक्‍ट्स को पूरा करें। इसमें खासकर एक्‍टर धनुष का जिक्र आया, जिन्‍होंने एकसाथ कई प्रोड्यूसर्स से एडवांस पैसे लिए हैं। फ़िल्म निर्माताओं से अपील की गई है कि, वह एक्‍टर धनुष की नई फिल्मों पर काम शुरू करने से पहले तमिल फिल्म निर्माता संघ से सलाह जरूर लें।
 
बैठक में TFPC ने यह भी कहा कि वह एक नए नियम पर काम कर रहे हैं, जिससे सिनेमाघरों में फिल्‍मों को पूरा मौका मिले। नए नियमों के लागू होने के बाद यह तय किया जाएगा कि, 16 अगस्त 2024 के बाद से कोई भी एक्‍टर बिना जानकारी के किसी नई फिल्‍म पर काम ना करे। साथ ही तमिल फिल्म निर्माता संघ ने प्रोड्यूसर्स से अपील की है कि, वह किसी भी नए प्रोजेक्‍ट पर काम शुरू करने से पहले TFPC को इसकी जानकारी जरूर दें और पुरानी बची हुई फिल्‍मों की शूटिंग 30 अक्टूबर तक पूरी कर ले। इसके अलावा एक्‍टर्स और एक्‍ट्रेसेस की फीस, टेक्‍नीश‍ियन की सैलरी और दूसरे अन्य बढ़ते खर्च को भी नियमित करने की तैयारी है। इसके लिए तमिल फिल्म इंडस्‍ट्री का नए सिरे से गठ‍न होगा।
 
बैठक में आपसी सहमति से यह फैसला लिया गया है कि 01 नवंबर 2024 से तमिल सिनेमा की शूटिंग से संबंधित सभी प्रकार के काम बंद कर दिए जाएंगे। साथ ही भविष्य में फिल्म उद्योग से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए निर्माताओं, वितरकों और थिएटर मालिकों की एक संयुक्त कार्रवाई समिति बनाई गई है। तो ये रहे तमिल फिल्मों से संबंधित नए नियम, जो सराहनीय हैं लेकिन फैंस के लिए दुखद हैं। वैसे यह पहली बार नहीं है, जब तमिल सिनेमा को उसकी खामियों के कारण बंद किया जा रहा है। इससे पहले, 2018 में भी प्रोड्यूसर्स के मुनाफे में हिस्‍सेदारी के मुद्दे पर इसी तरह मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन थ‍िएटर मालिकों ने हड़ताल की थी। लेकिन इस बार TFPC ने ये निर्णय एक्‍टर्स और टेक्‍नीश‍ियन के खिलाफ लिए हैं।
 
अब TFPC के निर्णयों को लेकर आपके क्या विचार हैं? आपसभी अपने-अपने भाषाओं के फ़िल्म इंडस्ट्री को लेकर क्या सुझाव देना चाहते हैं? अपने जवाब कमेंट बॉक्स में जरूर दीजिये।

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