देश की पहली किन्नर दरोगा के संघर्षों की कहानी

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एक कविता तो आपने सुनी ही होगी। लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती और कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। ये महज एक कविता की पंक्ति नहीं है! बल्कि कई लोगों के जीवन की वास्तविक सच्चाई है। क्योंकि मेहनत वक्त मांगती है लेकिन फल भी बड़ा मीठा देती है। प्रत्येक इंसान को इस समाज में एक जंग लड़नी पड़ती है, लेकिन कई बार खुद को साबित करने की ये जंग, अपनों के खिलाफ भी लड़नी होती है और यही जंग जीवन जीने का सही ढंग सिखाती है।
 
खबरों के खिलाड़ी। विगत महीने जब बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर पद की परीक्षा के परिणाम घोषित हुए। तब परीक्षा में पास होने की खुशियों में सबसे अलग खुशी, मधु मानवी कश्यप की थी। जिनका नाम परीक्षा परिणाम के अंतिम रूप से घोषित की गयी सूची में शामिल था। अब सवाल है- आखिर मधु मानवी की ये खुशी इतनी अलग क्यों है? क्योंकि अमूमन, प्रत्येक परीक्षा परिणाम के बाद भर-भरकर दरोगा यानी सब-इंस्पेक्टर निकलते हैं। तो आईये शुरू करते हैं बिहार पुलिस में दरोगा बनी मधु मानवी के संघर्षों की कहानी।
 
आपको बता दे की संघर्ष से सफलता हासिल करने में परेशानी तब और बढ़ जाती है। जब अपने ड्रीम को पूरा करने के लिए समय, समाज और सिस्टम तीनों से एक साथ लड़ाई लड़नी पडती है। कुछ ऐसी ही मुश्किल और दर्दनाक कहानी है मधु मानवी की। मधु बताती हैं कि बांका से पटना आना और यहां आने के बाद नयी पहचान मिलना, उनके लिए इतना आसान भी नहीं था। मधु ने अपनी कहानी के बारे में बात करते हुए बताया कि, करीब दो साल पहले वह पटना आयी थीं। तब यही सोच थी कि कुछ बेहतर करना है, लेकिन क्या करना है, यह उस वक्त उन्होंने सोचा नहीं था। जब पटना में कुछ कोचिंग संस्थानों में, कोचिंग के सिलसिले में बातें करनी गईं तो उन्होंने उन्हें कोचिंग देने से मना कर दिया। क्योंकि उनकी यही सोच थी कि अगर कोई ट्रांसजेंडर क्लास करेगी तो इससे दूसरे बच्चों पर असर पड़ेगा। ऐसे में ट्रांसजेंडर वीमेन मधु मानवी थोड़ी परेशान हुई।
 
मधु मानवी कहती हैं कि, इसी बीच मेरी मुलाकात “अदम्य अदिति गुरूकुल” चलाने वाले गुरू रहमान से हुई और उनको मैंने सारी बातें बताईं। पूरी बात सुनने के बाद, गुरु रहमान ने मुझे कहा कि तुम मेरी कोचिंग में पढ़ोगी और उसी वक्त उन्होंने मेरे माथे पर तिलक लगा दिया। उस दिन के बाद से मेरी दुनिया ही बदल गयी, मैं रोज पांच से छह घंटे कोचिंग करती थी। इसके बाद जो भी डाउट्स होते थे, उनको सुलझाने का प्रयास करती थी और आज नतीजा पूरी दुनिया के सामने हैं। मधु से जब यह पूछा गया कि, समाज का और परिवार का आपके साथ रवैया कैसा रहा? तो मधु कहती हैं कि, समाज के बारे में वह कुछ खास नहीं बता सकती लेकिन परिवार का रवैया उनके साथ बेहतर था। बता दें कि, मानवी मधु कश्यप! जिन्होंने बचपन में ही अपने पिता को खो दिया था। उसने बिहार की पहली ट्रांसजेंडर दारोगा बनकर इतिहास रच दिया है। अपने संघर्षों और समाज के तानों को मात देते हुए, उन्होंने ये मुकाम हासिल किया है। मधु की कहानी प्रेरणा देती है कि, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से कुछ भी हासिल किया जा सकता है।
बिहार पुलिस में दारोगा के पद पर चयनित होने वाले तीन ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों में मधु एकमात्र ट्रांसवुमेन हैं। बांका जिले की रहने वाली मधु ने बताया कि बचपन से ही उन्हें अपनी पहचान को लेकर भेदभाव का सामना करना पड़ा। नौवीं कक्षा में आते-आते उन्हें एहसास हुआ कि वह दूसरे लड़कों से अलग हैं। तब समाज और रिश्तेदारों के तानों से बचने के लिए उन्होंने अपनी असली पहचान छुपाकर रखी। इस दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और स्नातक की डिग्री हासिल की। एक न्यूज पोर्टल को मधु ने बताया कि, उनके पिता का साया उनके बचपन में ही उठ गया था। परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मंजिल पाने के लिए कड़ी मेहनत करती रहीं। साल 2022 में मधु मानवी ने मद्य निषेध विभाग में सिपाही पद के लिए परीक्षा दी थी। तब लिखित परीक्षा में सफलता मिली लेकिन शारीरिक परीक्षा में वह चूक गईं। उस दौरान उनकी सर्जरी हुई थी और वह छह महीने तक बिस्तर पर रहीं। इस दौरान 09 साल तक मधु अपने गांव तक नहीं जा पाईं। उनकी मां सबसे छिपकर, उनसे मिलने के लिए पटना आती थीं। लेकिन मधु ने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी जारी रखी। इस बार उन्होंने दारोगा पद के लिए आवेदन किया और सफलता हासिल की।
 
मधु कि इच्छा है कि, वह अपनी वर्दी पहनकर अपने गांव जरूर जाएंगी और सबको बताएंगी कि उन्हें ट्रांसजेंडर होने पर कोई शर्म नहीं है। वह अपनी मां को वर्दी में सैल्यूट करना चाहती हैं। मधु की यह कहानी उन सभी लोगों के लिए मिसाल है जो सामाजिक रूढ़ियों और भेदभाव का सामना करते हुए अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। क्योंकि एक छोटे से गांव की रहने वाली मानवी मधु कश्यप देश की पहली ट्रांसजेंडर वीमेन दरोगा बनीं हैं। बिहार पुलिस में पहली बार तीन ट्रांसजेंडर सब-इंस्पेक्टर यानी दरोगा बने हैं। इन तीनों में दो ट्रांसमेन हैं और मधु एक ट्रांसवूमेन हैं। इस खुशखबरी को सुनते ही मधु मानवी का चेहरा खुशी से खिल उठा है और मधु ने कहा कि, मैं सबसे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धन्यवाद देना चाहती हूँ। साथ ही गुरु रहमान सर, जिन्होंने मुझे यहां तक पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। तो ये थी देश की पहली ट्रांसजेंडर दरोगा मधु मानवी के संघर्षो की कहानी।

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