संसद का मॉनसून सत्र समाप्त होने के बाद, भाजपा अब हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुट गई है। भाजपा के उम्मीदवारों की पहली सूची इस महीने के अंत तक जारी की जाएगी। इस बाबत बीजेपी ने चुनाव की रणनीति पर कई बैठकें की हैं और 15 अगस्त के बाद केंद्रीय चुनाव समिति की भी बैठक होगी। ऐसे में आईये जानते हैं, क्या भाजपा महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए तैयार है? साथ हीं जानिए, क्या है भाजपा की खास रणनीति?

खबरों के खिलाड़ी। संसद का मॉनसून सत्र खत्म होने के बाद बीजेपी अब आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुट गई है। क्योंकि इस साल के अंत में हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभाओं के चुनाव होने हैं और बीजेपी अभी महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार में है। वही, हरियाणा में अकेले ही राज कर रही है। जबकि झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन की सरकार है। विधानसभा चुनावों को लेकर, भारतीय जनता पार्टी ने इन तीनों राज्यों के लिए चुनाव प्रभारी नियुक्त कर दिए हैं और पार्टी के चुनाव की तैयारियों पर एक शुरुआती बैठक भी हो चुकी है।
एक दैनिक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी इस महीने के आखिर में तीनों राज्यों के लिए विधानसभा उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने की योजना बना रही है। महाराष्ट्र के लिए 30-35, हरियाणा के लिए करीब 20 और झारखंड के लिए 25 उम्मीदवारों की घोषणा करने पर काम चल रहा है। बता दें कि, उम्मीदवारों की पहली सूची में वे सीटें शामिल होंगी, जो भाजपा पिछले चुनाव में हारी थीं या कम अंतर से जीती थीं। इसमें SC और ST समुदायों के लिए आरक्षित कुछ निर्वाचन क्षेत्र भी शामिल हो सकते हैं। लोकसभा चुनाव परिणाम से सबक लेते हुए भाजपा पूरी तरह से चौकन्ना है।
बता दें कि लोकसभा चुनावों के दौरान, एससी वोटों का एक बड़ा हिस्सा इंडिया गठबंधन की ओर चला गया था। इसलिए समय से पहले टिकटों की घोषणा करके, भाजपा उम्मीदवारों को एससी समुदाय द्वारा पार्टी के सामने आने वाले विरोध से निपटने के लिए पर्याप्त समय देना चाहती है। हालांकि भाजपा को हरियाणा और झारखंड में टिकटों का ऐलान करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। क्योंकि भाजपा हरियाणा और झारखंड में ज्यादातर सीटों पर चुनाव लड़ेगी। लेकिन महाराष्ट्र में उसे अपने सहयोगी दलों शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को विश्वास में लेना होगा। क्योंकि महाराष्ट्र में भाजपा के सहयोगी दलों का विरोधी तेवर शुरू हो चुका है।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति 15 अगस्त के बाद बैठक करेगी। इसमें उम्मीदवारों की पहली सूची तैयार की जाएगी। बता दें कि, पिछले साल मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने जिन सीटों पर हार का सामना किया था। वहाँ भी भाजपा ने उम्मीदवारों की जल्दी घोषणा की, इस रणनीति को अपनाया था और यह रणनीति कारगर साबित हुई। क्योंकि पार्टी ने 2018 में हारी हुई कई सीटें जीतीं और वर्तमान में इन तीनों राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में उसकी सरकारें हैं।
अब भाजपा की इस रणनीति पर विपक्षी दलों की क्या तैयारियां हैं, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। क्योंकि इस बार विपक्ष के संविधान बचाओ-आरक्षण बचाओ जैसे मुद्दे को विफल करने की तैयारी, भाजपा कर चुकी है। इसकी शुरुआत भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा SC/ST के “कोटे में कोटा” फैसले को खारिज कर बिगुल फूँक दिया है। भाजपा sc-st वोटों में किसी भी प्रकार की सेंधमारी हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में नहीं चाहता।
इन तीनों राज्यों के विधानसभा चुनाव को लेकर, आपके क्या विचार हैं? अपने जवाब कमेंट बॉक्स में जरूर दीजिये।