हरियाणा विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर कांग्रेस बना सकती है सरकार, क्योंकि संकेत भाजपा के पक्ष में नहीं दिख रहे। बता दें कि, हरियाणा विधानसभा चुनाव की तारीख़ों का एलान हो चुका है और राज्य की 90 विधानसभा सीटों पर होने जा रहे, इस चुनाव में कई पार्टियां मुक़ाबले के लिए तैयार हैं। क्योंकि चुनाव आयोग ने 16 अगस्त को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग एक चरण में 01 अक्टूबर को होगी और चुनाव के नतीजे 04 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। हरियाणा के साथ ही जम्मू-कश्मीर में भी तीन चरणों मे चुनाव होने जा रहे हैं और यहां भी नतीजे 4 अक्टूबर को ही घोषित किए जाएंगे। ऐसे में आईये जानते हैं, हरियाणा की राजनैतिक जमीन का पिछला तथ्य और क्या बन रहे राजनैतिक समीकरण।

खबरों के खिलाड़ी। लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की लगातार तीसरी जीत के बाद, अब पहली बार इन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं और हरियाणा विधानसभा में कई पार्टियां हैं, जिनके बीच मुक़ाबला रहेगा। जहां भारतीय जनता पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अकेले मैदान में हैं। वहीं, इंडियन नेशनल लोक दल और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन बनाकर चुनाव में हिस्सा ले रही हैं। इसके अलावा जननायक जनता पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी या किसी के साथ गठबंधन करेगी इसकी घोषणा उसने अब तक नहीं की है। भाजपा ने ये एलान किया है कि, वह इस चुनाव में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी। वहीं, कांग्रेस ने अभी भी किसी मुख्यमंत्री चेहरे की घोषणा नहीं की है।
बता दें कि, इस साल जुलाई में ही बहुजन समाज पार्टी और इंडियन नेशनल लोकदल ने गठबंधन बनाकर विधानसभा चुनाव में लड़ने का एलान किया था और इस गठबंधन का चेहरा अभय सिंह चौटाला को बनाया गया है। चौटाला, इस गठबंधन की तरफ़ से मुख्यमंत्री उम्मीदवार होंगे। आईये अब जानते हैं, कैसा रहा हरियाणा विधानसभा का पिछला कार्यकाल? बता दें कि, हरियाणा में पिछला विधानसभा चुनाव अक्टूबर 2019 में हुआ था। उस वक़्त हरियाणा में गठबंधन की सरकार बनी थी और मनोहर लाल खट्टर लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनाए गए थे। तब दुष्यंत चौटाला उस सरकार में अपनी नई पार्टी जननायक जनता पार्टी के साथ शामिल थे और वो उप-मुख्यमंत्री बनाए गए थे। बता दें कि, वर्ष 2019 के उस चुनाव में बीजेपी को 40 और जननायक जनता पार्टी को 10 सीटें हासिल हुई थीं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 46 था। जिसके बाद भाजपा और जेजेपी ने साथ आकर गठबंधन की सरकार बनाई। क्योंकि 75 से ज़्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य बनाने के बावजूद भी बीजेपी को बहुमत हासिल नहीं हुआ था। तब सरकार की स्थिरता के लिए भाजपा ने उस वक्त निर्दलीय उम्मीदवारों पर निर्भर रहने के बजाय, जननायक जनता पार्टी के साथ जाने का फ़ैसला लिया था। हालांकि भाजपा का ये फ़ैसला, उसके कुछ समर्थकों को रास नहीं आया था। क्योंकि अपनी पार्टी के प्रचार में जेजेपी, लगातार भाजपा की जमकर आलोचना करते आए थे।
सरकार में शामिल, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने वृद्धा पेंशन को 5100 रुपये तक बढ़ाने और स्थानीय युवाओं के लिए 75% नौकरियों की आरक्षित करने का वादा किया था, जो गठबंधन सरकार में पूरा नहीं हुआ। तब मार्च 2024 में इस गठबंधन के साढ़े चार साल पूरा होने के बाद, जेजेपी ने बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ लिया। वहीं, 2019 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 31 सीटें मिली थीं और इंडियन नेशनल लोक दल ने भी एक सीट हासिल की थी। वहीं, HLP नेता गोपाल कांडा ने एक सीट जीती थी। जबकि बाकी सीट निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गयी। इन सियासी उलटफेर के दौरान, लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मनोहर लाल खट्टर का इस्तीफ़ा और नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाया जाना भी नया आयाम रचते दिखाई दिया। क्योंकि बीजेपी-जेजेपी गठबंधन के टूटने के बाद, मनोहर लाल खट्टर ने लोकसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया। इसके बाद खट्टर ने करनाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, जबकि सैनी ने करनाल से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीते। तब मनोहर लाल खट्टर को बीजेपी केंद्र में ले आई और सैनी ने मुख्यमंत्री बनकर राज्य सरकार का ज़िम्मा संभाला।
बता दें कि, हरियाणा के हालिया लोकसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस को 5-5 सीटें मिली हैं। जबकि बीजेपी राज्य की सभी 10 सीटों को जीतने का दावा कर रही थी, जैसा कि पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में किया भी था। लेकिन इस बार बीजेपी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली और 05 सीट का नुकसान हो गया। इस नुकसान को बीजेपी के 10 सालों के शासन के ख़िलाफ़ संकेत माना जा रहा है। अतः हरियाणा के चुनाव इस लिहाज से भी दिलचस्प हो गए हैं कि, लगातार दो बार सरकार बनाने वाली बीजेपी के लिए लोकसभा चुनावों के नतीजे मनमाफिक नहीं आए। इसके बाद वहां कांग्रेस को अपने लिए ज्यादा उम्मीद नजर आ रही है।
हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के नतीजे, इस कदर अलग-अलग आते रहे हैं। ऐसे में ऐसी उम्मीदों को, एक हद से ज्यादा तवज्जो नहीं दी जा सकती। अब कुल मिलाकर देखें तो नतीजे जो भी आएं, लेकिन चुनाव हमारी लोकतांत्रिक चेतना का संदेश बनकर आते हैं। उम्मीद है कि इस बार भी यह संदेश दुनिया को अधिकाधिक मजबूती से मिलेगा। फिर भी भाजपा के लिए हरियाणा का विधानसभा चुनाव अग्निपरीक्षा साबित होगी।