खबरों के खिलाड़ी । विधानसभा के नतीजों से पहले ही जहां महाविकास आघाड़ी (एमवीए) और महायुति ने अपनी- अपनी जीत के दावे करने शुरू कर दिए हैं, वहीं दोनों गठबंधनों में सीएम पद को लेकर आंतरिक रूप से टकराव भी शुरू हो गया है। एमवीए में कांग्रेस जहां सीएम पद पर अपना दावा कर रही है, वहीं उसकी सहयोगी शिवसेना (यूबीटी) इससे साफ इन्कार कर रही है। दूसरी तरह, महायुति में भाजपा और शिवसेना सीएम की कुर्सी को लेकर आमने-सामने खड़े दिख रही हैं।
नतीजे की बात करे तो 23 को आने है । उससे पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने दावा कर दिया है कि प्रदेश में एमवीए की सरकार बनेगी और मुख्यमंत्री कांग्रेस का होगा। पटोले की इस बात पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने इस कहा कि हमें यह स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा, अगर ऐसा है तो राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को नाना पटोले को मुख्यमंत्री घोषित कर देना चाहिए।वहीं, मुख्यमंत्री पद को लेकर सत्ताधारी दल महायुति में भी रस्साकशी शुरू हो गई है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, भाजपा कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनना चाहिए। वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता संजय शिरसाट ने कहा कि विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री के चेहरे पर लड़ा गया। इसलिए हमें लगता है कि मुख्यमंत्री पद पर एकनाथ शिंदे का हक है। बात दे की 2019 की तुलना में इस बार चार फीसदी ज्यादा मतदान हुआ है। मुंबई में 30 साल बाद मतदान का प्रतिशत बढ़ा है। वहीं, ज्यादातर क्षेत्रों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने बढ़चढ़कर मतदान किया। इसको लेकर दोनों ही गठबंधन के नेता अपनी-अपनी जीत की गणना में व्यस्त हैं। इस बीच, चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि महायुति को बहुमत मिले या न मिले, लेकिन सरकार बनाने के लिए हम निर्दलीय विधायकों को अपने साथ रखेंगे। संकेत साफ है कि भाजपा ने अभी से निर्दलीय उम्मीदवारों को अपनी तरफ लाने की तैयारी शुरू कर दी है।
उपमुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि राज्य में जब भी मतदान प्रतिशत बढ़ता है तब भाजपा को फायदा होता है। हमने दो दर्जन से अधिक विधानसभा क्षेत्रों के बारे में संपर्क किया तो पता चला कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं का वोट प्रतिशत बढ़ा है। इसकी सबसे बड़ी वजह लाड़ली बहना योजना है। वहीं, उद्धव ठाकरे ने कहा है कि भाजपा ने राज्य की राजनीतिक संस्कृति को नुकसान पहुंचाया है। कहने के लिए चुनाव लोकतंत्र का उत्सव है, असल में पैसों का उत्सव हुआ।