यूपी उपचुनाव को पीडीए बनाम पीडीए की लड़ाई में बदलकर, योगी ने सपा की ईंट से ईंट बजा दी। अब आप सोचेंगे! आखिर हुआ कैसे? तो आईये बताते हैं! हुआ कुछ ऐसे। आपको बता दें कि- उत्तरप्रदेश में 09 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी ने सात सीटें जीतकर बड़ी बढ़त बनाई, जबकि समाजवादी पार्टी ने महज 02 सीटों पर जीत दर्ज की है। जबकि इस उपचुनाव से पहले! इन 09 सीटों में से चार सीटों पर समाजवादी पार्टी के विधायक थे। इन 04 सीटों में करहल, कटेहरी, कुंदरकी और सीसामऊ शामिल थे। वहीं, भाजपा गठबंधन के पास खैर, गाज़ियाबाद, फूलपुर, मझवां और मीरापुर की सीटें थीं। लेकिन अब आकंड़ा 5-4 का नहीं! बल्कि 7-2 का हो गया है। अब उपचुनाव के नतीजों के बाद, समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया कि- भाजपा ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया और कुछ लोगों को वोट डालने से रोका गया।
वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि- यह जीत डबल इंजन सरकार की नीतियों और कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम है। हालांकि मतदान के दौरान समाजवादी पार्टी ने बीजेपी पर, सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। जिसके बाद चुनाव आयोग ने पांच अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी। क्योंकि मीरापुर विधानसभा में पुलिस-प्रशासन पर आरोप लगे थे कि- वे मुस्लिम मतदाताओं को वोट डालने से रोक रहे हैं और इस सीट पर एक पुलिसकर्मी की तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें वह पिस्टल लहराते हुए महिलाओं को कथित तौर पर धमका रहे थे। लेकिन मुज़फ़्फ़रनगर के SSP अभिषेक सिंह ने इन आरोपों को नकार दिया है। अब उपचुनाव के नतीजों के बाद, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ‘इलेक्शन में करप्शन’ का मुद्दा उठाया है। अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा- “इलेक्शन’ को ‘करप्शन’ का पर्याय बनाने वालों के हथकंडे तस्वीरों में क़ैद होकर, दुनिया के सामने उजागर हो चुके हैं। दुनिया से लेकर देश और उत्तर प्रदेश ने इस उपचुनाव में चुनावी राजनीति का सबसे विकृत रूप देखा है।
वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है की- “यह चुनाव समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन की ‘लूट’ और ‘झूठ’ की पॉलिटिक्स के अंत की उद्घोषणा है। इसके अलावा प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा की- समाजवादी पार्टी का ‘पीडीए”, अब परिवार डेवलपमेंट एजेंसी’ बन गया है। आपको बता दें कि- सपा ने पीडीए अर्थात पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक फॉर्मूले के सहारे, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी चुनौती दी थी, जहां सपा को 37 सीटों पर जीत मिली थी। जबकि भाजपा 64 सीटों से घटकर 33 सीटों पर सिमट गई थी। अब इस उपचुनाव में भी सपा ने पीडीए फॉर्मूला अपनाया और उसी आधार पर अपने उम्मीदवार उतारे। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि- योगी के नेतृत्व में भाजपा ने भी, अपने उम्मीदवारों के चयन में ‘पीडीए’ का समीकरण साधने की कोशिश की। अर्थात “बीजेपी के पीडीए में ‘ए’ का मतलब ‘अगड़ा’ है।
जबकि समाजवादी पार्टी में ‘ए’ का मतलब ‘अल्पसंख्यक’ है। अर्थात योगी ने अपने नारे “बंटोगे तो कटोगे” को सार्थक करते हुए, हिन्दू बनाम मुस्लिम के रूप में उपचुनाव को मोड़ दिया। जिसका परिणाम! अब 7-2 के रूप में सबके सामने है।इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी, एआई-एमआई-एम और आज़ाद समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी को मीरापुर में नुकसान पहुंचाया है। जहां जीत-हार का जितना अंतर है, उससे ज्यादा वोट इन दलों को मिले हैं। वहीं फूलपुर और कटेहरी में अकेले बसपा उम्मीदवार ने सपा का खेल खराब किया है। क्योंकि चुनाव आयोग के मुताबिक- सपा उम्मीदवार का बीजेपी से तकरीबन 12 हजार वोट का फासला था, लेकिन बसपा को यहां बीस हज़ार वोट मिले हैं। इसके अलावा कटेहरी में बसपा उम्मीदवार को 32 हज़ार से ज्यादा वोट मिले हैं। अगर सपा की शोभावती वर्मा के खाते में अगर इसे जोड़ दिया जाए तो, यह भाजपा के धर्मराज निषाद से ज्यादा वोट हैं। वहीं मझवां में बसपा के दीपक तिवारी भी सपा की जीत में बाधा बने हैं और उन्हें 34000 वोट मिले। यहां भी सपा उम्मीदवार ज्योति बिंद 5000 वोटों से पीछे रह गईं।
अब स्पष्ट है कि- समाजवादी पार्टी को वोट के इस बिखराव को रोकने के लिए, भविष्य में ध्यान रखना पड़ेगा। हालांकि इस उपचुनाव के बाद, सीएम योगी आदित्यनाथ की साख भी बढ़ी है। क्योंकि उपचुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के पास चार सीटें थीं और पूरा उपचुनाव सीएम योगी के नेतृत्व में लड़ा गया था। ऐसे में योगी आदित्यनाथ ने ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ का नारा दिया, जबकि समाजवादी पार्टी ने ‘जुड़ेंगे तो जीतेंगे’ का नारा दिया। लेकिन विश्लेषकों के मुताबिक- उपचुनाव के नतीजे बताते हैं कि, योगी का नारा जनता को ज्यादा पसंद आया है। अब यूपी उपचुनाव के इस अप्रत्याशित परिणाम पर, आपकी क्या प्रतिक्रिया है? जवाब जरूर दें।