खबरों के खिलाड़ी । झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 का सबसे अहम पहलू! जेल से लेकर सत्ता में वापसी तक, आखिर कैसे चला हेमंत सोरेन की कल्पना का जादू। बता दें कि- झारखंड के राजनीतिक इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। जब कोई सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर, दूसरी बार सत्ता में वापस आई है। क्योंकि झारखंड में हुए विधानसभा चुनावों में हेमंत सोरेन की पार्टी झामुमो को 34 सीटें मिली हैं। जबकि उनके गठबंधन की प्रमुख पार्टी कांग्रेस को 16 और राष्ट्रीय जनता दल को 4 सीटें मिली हैं। ऐसे में अब सवाल है- लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी, क्या हेमंत सोरेन के कामकाज की वजह से संभव हुआ? क्या हेमंत ने पूर्व में किए, अपने सभी वादे निभा दिए? जिससे जनता ने उन्हें 56 सीटों के साथ दूसरी बार सरकार बनाने का मौका दिया। तो आईये जानते हैं, इन सवालों का जवाब विस्तार से।

बता दें कि- इसी साल हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर, झारखंड की 14 में से 08 सीटें जीतने में सफल रही थी। जबकि झामुमो को 03 और कांग्रेस को 02 सीटें मिली थीं।तब से लेकर अब तक! राज्य की राजनीतिक गलियारे में काफी कुछ बदल गया और उस दौरान हेमंत सोरेन जेल में थे। आपको बता दें कि- हेमंत सोरेन से जब भी उनके कामकाज के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने ये कहा कि- दो साल कोरोना में निकल गए, बाकि समय में भाजपा ने लगातार उनकी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की। भाजपा के रणनीतियों से बचने और अपनी सरकार को बचाने में काफी समय निकल गया। बता दें कि- झारखंड में पिछले कुछ अरसे से! भाजपा और झामुमो के बीच खींचतान जारी है। खींचतान के बीच! भाजपा द्वारा हेमंत सोरेन को सत्ता से बाहर करने की कोशिशें भी हुई। इन कोशिशों की शुरूआत पूर्व सीएम रघुबर दास की तरफ से हुई थी। क्योंकि वर्ष 2022 में रघुवर दास ने आरोप लगाया कि- हेमंत सोरेन ने सीएम के पद पर रहते हुए, पत्थर माइनिंग लीज अपने नाम करा ली। जबकि यह लीज! हेमंत सोरेन के सीएम बनने से पहले लिया गया था। जिसे हेमंत ने सीएम रहने के दौरान, केवल रिन्यू कराया था।
हालांकि, इसी दौरान लीज को निरस्त भी कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर एक केस में साल 2022 में ईडी ने, साहेबगंज जिले में अवैध पत्थर माइनिंग से संबंधित केस दर्ज किया।इसमें सीएम हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा को आरोपी बनाया गया और उन्हें जेल भी हुई। हालांकि, वर्तमान में पंकज जमानत पर बाहर हैं और इसी मामले में हेमंत सोरेन से भी ईडी ने पूछताछ की। इसके अलावा! तीसरी कोशिश के तौर पर देखें तो, वर्ष 2022 में ही बंगाल पुलिस ने झारखंड के तीन कांग्रेसी विधायकों को पैसों के साथ पकड़ा। उससमय चर्चा ये थी कि- इन तीनों विधायकों के अलावा, सात और विधायक भाजपा के संपर्क में थे। हालांकि! इन विधायकों के पकड़े जाने के बाद, भाजपा द्वारा सरकार गिराने की कोशिश विफल हो गई। लेकिन फिर चौथी बार कोशिश हुई और वह कोशिश आंशिक तौर पर कामयाब भी हुई। जिसमें ईडी के पूछताछ के बाद, 31 जनवरी को हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी कर, उन्हें जेल भेजा गया। तब हेमंत के जेल जाने के बाद, चंपई सोरेन को राज्य का कमान सौंपा गया। लेकिन आरोप यह है कि- चंपई कोल्हान इलाके के विधायकों का एक अलग गुट तैयार कर रहे थे। इस बीच ठीक छह महीने बाद, 28 जून को हेमंत जेल से बाहर आ गए और ठीक पांच दिन बाद, चंपाई सोरेन का इस्तीफा लेकर कमान हेमंत के हाथों में आ गयी।
अतः सवाल उठना लाजमी है- आखिर कैसे! इन सब चीजों से पार पाते हुए, हेमंत सोरेन ने इतना प्रचंड बहुमत पा लिया? तो आपको बता दें कि- जो आरोप बीजेपी लगाती रही या फिर जिन मामलों की जांच केंद्रीय एजेंसी कर रही थी। वे आरोप साबित नहीं हो पाए और हेमंत के जेल जाने के बाद, बैकअप के तौर पर कल्पना सोरेन तैयार हो गई थीं। क्योंकि कल्पना! हेमंत की बात लोगों तक लगातार पहुंचा रही थी और इसका असर ये हुआ कि- झामुमो के पारंपरिक मतदाताओं के अलावा, पूरा आदिवासी समाज उनके साथ आकर खड़ा हो गया। क्योंकि झारखंड में आदिवासी सुरक्षित 28 सीट के अलावा भी कई ऐसी सीटे हैं! जहां आदिवासी मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं और इसी का परिणाम है कि- हेमंत सोरेन प्रचंड बहुमत लेकर आए और अब राजनैतिक सफलता के पैमाने पर, अपने पिता शिबू सोरेन से बड़ी लकीर खींच गए। अगर राजनीतिक दांव पेच को छोड़ दें तो, हेमंत के अंदर कोई नकारात्मक पक्ष नहीं दिखा। हेमंत और कल्पना ने चुनौतियों का काबिलियत के साथ सामना किया। जिसका परिणाम! झारखंड चुनाव के नतीजों में देखा गया। अब आपको ये जानकारी कैसी लगी? अपने जवाब जरूर दीजिएगा।