नई दिल्ली मे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला का हुआ समापन

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खबरों के खिलाड़ी । नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2024 का आज भव्य समापन हुआ। बात दे यह मेला 14 से 27 नवंबर 2024 तक आयोजित किया गया था, जिसमें रेल मंत्रालय ने ‘भविष्यवादी भारतीय रेल’ की थीम के तहत अपनी प्रस्तुति दी। इस वर्ष मेले की थीम ‘विकसित भारत @2047’ थी, जो आत्मनिर्भर भारत और भारत के 2047 तक सशक्त राष्ट्र बनने के विजन को दर्शाती है।

भारतीय रेलवे मंडप की मुख्य विशेषताएं भारतीय रेलवे के मंडप ने इस बार दर्शकों को अपनी तकनीकी प्रगति और नवाचारों से प्रभावित किया। मंडप में रेलवे की ऐतिहासिक यात्रा, तकनीकी विकास, और भविष्य की योजनाओं की झलक प्रस्तुत की गई। बनारस रेल इंजन कारखाने के लोको मॉडल बने आकर्षण मंडप में बनारस रेल इंजन कारखाना (BLW) द्वारा निर्मित विश्वस्तरीय डब्ल्यूएपी-7 यात्री वाहक इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव और निर्यात लोकोमोटिव के मॉडल आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे।इन मॉडलों ने भारतीय रेलवे की तकनीकी उत्कृष्टता और वैश्विक पहचान को बखूबी प्रदर्शित किया। इन मॉडलों ने आगंतुकों, विशेष रूप से बच्चों और युवाओं का ध्यान खींचा।

मंडप के अन्य मुख्य आकर्षण 1. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरिडोर (बुलेट ट्रेन परियोजना): साबरमती स्टेशन की संरचना का एक मॉडल, जो परियोजना की उन्नति को दर्शाता है। 2. पंबन और अंजि ब्रिज: इन दोनों प्रतिष्ठित पुलों के मॉडलों ने आगंतुकों को भारतीय रेलवे के तकनीकी कौशल और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता से परिचित कराया। 3. वंदे भारत एवं अमृत भारत : भारत की पहली सेमी-हाई स्पीड ट्रेन को दर्शाने वाली प्रस्तुति। रेलवे मंडप में इंटरएक्टिव स्क्रीन पर भारतीय रेलवे की विभिन्न परियोजनाओं और उनकी प्रगति को प्रदर्शित करते वीडियो प्रस्तुत किए गए। बच्चों के लिए मजेदार क्विज़ प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जो भारतीय रेलवे के बारे में नई जानकारियों को रोचक तरीके से सिखा रही थीं।

भारतीय रेलवे के मंडप ने हर उम्र के दर्शकों को आकर्षित किया। आगंतुकों ने भारतीय रेलवे के नवाचार और आत्मनिर्भरता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की प्रशंसा की। विशेष रूप से, BLW के लोकोमोटिव मॉडल ने रेलवे की वैश्विक उपस्थिति को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया। भारतीय रेलवे ने इस मेले के माध्यम से अपने आगामी प्रोजेक्ट्स और तकनीकी योजनाओं की झलक पेश की, जिससे ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति में रेलवे की भूमिका स्पष्ट हुई। 

 

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