असिस्टेंट लोको पायलट की परीक्षा दे कर लौट रहे छात्र के साथ हुई दुर्घटना

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खबरों के खिलाड़ी। ये मेरे भाई के पैर नहीं कटे, उन सपनों के पर कट गए, जो मेरे भाई के साथ पूरे परिवार ने देखे थे। वह पढ़ने में बहुत तेज है। हर परीक्षा दे रहा है, ताकि उसे कहीं सरकारी नौकरी मिल जाए। हम सभी को उम्मीद थी कि एक न एक दिन वह कामयाब होगा और घर की आर्थिक स्थिति सुधारेगा। लेकिन, अब भाई के दोनों पैरों के कट जाने से ये उम्मीद भी टूट गई। ये वाला पेपर देने के लिए वह अपनी बहन की शादी में भी शामिल नहीं हुआ। एक दिन पहले ही तो बहन विदा हुई थी। मैंने मां-पिता को नहीं बताया कि भाई के दोनों पैर कट गए हैं। किस मुंह से बताऊं कि उनकी उम्मीदें और सपने अब अपंग हो गए।

यह कहते-कहते कुलदीप फफक कर रो पड़े। कुलदीप अमरदीप यादव उर्फ संजीव के बड़े भाई हैं। वह प्रयागराज में ऑटो चलाते हैं। कानपुर के उसी हैलट अस्पताल में हैं, जहां उनका भाई अमरदीप भर्ती हैं। उन्होंने कहा, इस हादसे ने भाई को तोड़ कर रख दिया है। परिवार की उम्मीदें भी खत्म हो गईं। वह रेलवे के असिस्टेंट लोको पायलट की परीक्षा देने आया था। क्या पता था कि उसी रेलवे की ट्रेन से उसके दोनों पैर कट जाएंगे।

बात दे कि प्रयागराज के शिवकुटी के रहने वाले अमरदीप यादव उर्फ संजीव बुधवार को रेलवे की असिस्टेंट लोको पायलट की परीक्षा देने कानपुर आए थे। उनके साथ उनके दोस्त अमित मिश्रा भी थे। उनकी परीक्षा पहली पाली में थी। परीक्षा देने के बाद घर जाने के लिए शाम को ट्रेन पकड़ने कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर पहुंचे। यहां वह और अमित प्लेटफार्म नंबर 5 पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। करीब सवा 9 बजे प्लेटफार्म पर दिल्ली से रांची जा रही राजधानी एक्सप्रेस आ गई। भीड़ ज्यादा थी, तो वह भी ट्रेन में चढ़ने की कोशिश करने लगे। इसी बीच ट्रेन चल दी। अमित तो ऊपर चढ़ गए, लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण अमरदीप का पैर फिसल गया। इससे वह प्लेटफार्म और ट्रेन के बीच में फंस गए। उनके दोनों पैर कट गए। GRP ने मौके पर पहुंचकर अमरदीप को बाहर निकाला और हैलट में भर्ती कराया। इस बीच उनका दोस्त वहीं पास में बैठ गया। रोते हुए अमरदीप के कंधे पर हाथ फेर कर उन्हें दिलासा देता रहा। इस बीच रोते-रोते अमरदीप बेहोश हो गए।

सूचना थोड़ा संभलने पर अमित ने हादसे की सूचना अमरदीप के भाई कुलदीप को दी। खबर मिलते ही वह प्रयागराज से कानपुर पहुंचे। यहां अस्पताल में भाई की हालत देखकर उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। भाई तक आवाज न पहुंचे, इसके लिए वह कमरे के कोने में बैठकर रोने लगे। कुलदीप ने बताया कि मेरा भाई परिवार की स्थिति को सुधारने के लिए वह लगातार सरकारी नौकरी की परीक्षाओं को देने के लिए प्रयागराज से बाहर जाता रहता था। कानपुर में भी रेलवे की असिस्टेंट लोको पायलट की परीक्षा देने के लिए आया था। पिता शारदा प्रसाद यूनिवर्सिटी में कर्मचारी रहे हैं। अमरदीप के साथ पेपर देने आए दोस्त अमित मिश्रा ने बताया की अमरदीप पढ़ाई में बहुत होशियार है। उसका अधिकतर समय लाइब्रेरी में गुजरता था।

 

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