खड़गे की बगावत से सदमे मे कॉंग्रेस

Spread the love & Share it

खबरों के खिलाड़ीमहाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी शिकस्त के बाद घमासान तेज होता दिख रहा। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दो टूक कहा कि अब जवाबदेही तय करने का वक्त आ गया है। उन्होंने ये भी कहा कि पुराने ढर्रे की राजनीति से जीत नहीं मिल सकती। हरियाणा और महाराष्ट्र में पार्टी और गठबंधन की हुई करारी हार के बाद हुई पहली कांग्रेस वर्किंग कमिटि की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दो टूक कहा कि अब पार्टी में जवाबदेही तय करने का वक्त आ गया है।

इन दोनों ही राज्यों में महज चंद महीने पहले पार्टी का प्रदर्शन काफी संतोषजनक रहा था। शुक्रवार को हुई कांग्रेस के सर्वोच्च नीति निर्धारक इकाई की बैठक में खरगे के अलावा तमाम सीनियर नेता, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस की नवनिर्वाचित सांसद प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं। हालांकि बैठक खत्म होने से पहले ही राहुल और प्रियंका निकल गए। मीटिंग में खरगे ने पार्टी के जहां एक ओर इस निराशाजनक प्रदर्शन के लिए तमाम वजहों को गिनाया, वहीं उन्होंने ईवीएम का मुद्दा भी उठाया। खरगे का कहना है कि पार्टी में अनुशासन की कमी और पुराने ढर्रे की राजनीति के जरिए जीत नहीं मिल सकती। कांग्रेस के भीतर आपसी गुटबाजी एक स्थायी भाव बन चुकी है। खरगे ने इस ओर इशारा करते हुए कहा कि आपसी एकता की कमी और एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी हमें काफी नुकसान पहुंचाती है। खरगे ने कहा कि जब तक हम एक हो कर चुनाव नहीं लड़ेंगे, आपस में एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी बंद नहीं करेंगे, तब तक अपने विरोधियों को राजनीतिक शिकस्त नहीं दे पाएंगे। हमें हर हाल में एकजुट रहना होगा।

वहीं, उन्होंने अनुशासन पर जोर देते हुए संकेत दिया कि पार्टी के लोग अपने स्तर पर अनुशासन में बंधें। उनका कहना था वैसे तो पार्टी के पास अनुशासन का हथियार है, लेकिन हम नहीं चाहते कि अपने साथियों को किसी बंधन में डालें। खरगे का कहना है कि हमें अपने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना होगा। हमें मतदाता सूची बनाने से लेकर वोट की गिनती तक रात-दिन सजग, सचेत और सावधान रहना होगा। हमारी तैयारी शुरू से लेकर मतगणना तक ऐसी होनी चाहिए कि हमारे कार्यकर्ता और सिस्टम मुस्तैदी से काम करें। वहीं उन्होंने राज्यों को भी अपना संगठन मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि राष्ट्रीय मुद्दों और राष्ट्रीय नेताओं के सहारे राज्यों का चुनाव आप कब तक लड़ेंगे? हाल के चुनावी नतीजों का संकेत यह भी है कि हमें राज्यों में अपनी चुनाव की तैयारी कम से कम एक साल पहले शुरू कर देनी चाहिए। हमारी टीम समय से पहले मैदान में मौजूद रहनी चाहिए। वहीं उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी की तैयारियों पर नजर रखने की बात कही।

लोकसभा चुनाव के बाद दो राज्यों में पार्टी की करारी हार के बाद शुक्रवार को सीडब्ल्यूसी मीटिंग में खरगे द्वारा पार्टी की हार की वजहों का जिक्र कोई पहला मौका नहीं था, जब पार्टी ने अपनी कमियों की ओर इंगित किया हो। कांग्रेस समस्या जानती है, उसका निदान और उपचार भी जानती है, लेकिन इसके लिए जो इच्छा शक्ति की जरूरत होती है, वह पार्टी नेतृत्व में नजर नहीं आती। 2014 के आम चुनावो के बाद असेंबली चुनावों में पार्टी की हो रही लगातार हार के बाद 2016 में कांग्रेस के तत्कालीन महासचिव दिग्विजय सिंह ने पार्टी में मेजर सर्जरी की जरूरत बताई थी। देखना दिलचस्प होगा कि खरगे द्वारा पार्टी की कमियों की ओर किया गया यह इशारा क्या वाकई पार्टी और नेताओं के भीतर कोई बदलाव लाएगा, क्या पार्टी अनुशासन की ब्लेड से मेजर सर्जरी कर पाएगी या फिर यह भी बस एक खानापूर्ति बन कर रह जाएगा?

 

Spread the love & Share it

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *