
Tejashwi Yadav dual voter ID row: बिहार में स्पेशल इंटेंस रिवीजन (SIR) प्रक्रिया का विरोध करना आरजेडी नेता और मुख्यमंत्री पद के दावेदार तेजस्वी यादव को भारी पड़ता दिख रहा है। दरअसल, उन्होंने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है, लेकिन जब उन्होंने EPIC नंबर से चेक किया तो वह रिकॉर्ड ही नहीं मिला।
अब इस पूरे मामले ने राजनीतिक से ज्यादा कानूनी रूप ले लिया है, क्योंकि चुनाव आयोग ने तेजस्वी को नोटिस जारी करते हुए उनके बताए EPIC नंबर को फर्जी करार दिया है।
क्या है पूरा मामला?
तेजस्वी यादव ने जब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद अपना नाम ऑनलाइन चेक किया, तो EPIC नंबर से कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। उन्होंने चुनाव आयोग पर हमला बोला, लेकिन आयोग ने दूसरे EPIC नंबर के साथ उनका नाम लिस्ट में दिखा दिया। यहीं से शक पैदा हुआ कि क्या तेजस्वी यादव के पास दो वोटर कार्ड हैं?
अब आयोग ने उनसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताए गए EPIC नंबर से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं और कहा है कि इस नंबर से कोई आधिकारिक रिकॉर्ड जारी नहीं किया गया है, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका गहराई है।
दो वोटर कार्ड रखना अपराध क्यों है?
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 17 और 18 के तहत-
- कोई व्यक्ति एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में रजिस्टर नहीं हो सकता। एक निर्वाचन क्षेत्र में भी एक से अधिक बार नाम दर्ज नहीं किया जा सकता।
- अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर फर्जी घोषणा करता है या गलत जानकारी देकर EPIC कार्ड बनवाता है, तो यह धारा 31 के अंतर्गत अपराध माना जाएगा। इसमें एक साल की जेल, जुर्माना या दोनों सज़ाएं हो सकती हैं।
क्या तेजस्वी पर हो सकता है चुनाव लड़ने पर रोक?
अगर यह साबित हो जाता है कि-
तेजस्वी यादव के पास दो वोटर कार्ड हैं और उनमें से एक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जारी हुआ है। तो न सिर्फ आयोग एक EPIC नंबर को रद्द कर सकता है, बल्कि धोखाधड़ी (धारा 182 BNS) के तहत केस भी दर्ज किया जा सकता है। हालांकि, पूर्व चुनाव अधिकारियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में आमतौर पर पहले व्यक्ति को मौका दिया जाता है कि वह एक कार्ड सरेंडर कर दे।
क्या EPIC कार्ड ज़रूरी है वोट डालने के लिए?
- नहीं। EPIC कार्ड (वोटर ID) ज़रूरी नहीं है अगर नाम वोटर लिस्ट में मौजूद है।
- वोटर लिस्ट में नाम होने पर 11 वैकल्पिक दस्तावेजों से भी मतदान किया जा सकता है।
राजनीतिक असर क्या होगा?
तेजस्वी यादव आरजेडी के मुख्यमंत्री चेहरे हैं और इस विवाद से उनकी राजनीतिक साख को नुकसान पहुंच सकता है।
अगर आयोग की जांच में दोष सिद्ध होता है तो यह मामला NDA के लिए चुनावी मुद्दा भी बन सकता है।
फिलहाल चुनाव आयोग का स्टैंड
नोटिस भेजकर दस्तावेज मांगे गए हैं। जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई। यदि दोष पाया गया, तो एक EPIC नंबर को रद्द किया जाएगा और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।