
Chandauli News: चंदौली जिले के बहुचर्चित बलवा और मारपीट के मामले में समाजवादी पार्टी के विधायक प्रभु नारायण सिंह यादव और उनके भाई अनिल यादव को बड़ी राहत मिली है। एमपी-एमएलए की विशेष अदालत ने सोमवार को दोनों आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
विशेष न्यायाधीश ने क्या कहा
विशेष न्यायाधीश अशोक कुमार की अदालत ने निचली अदालत द्वारा 2023 में दिए गए सजा के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि प्राथमिकी (FIR) घटना के 21 घंटे बाद दर्ज की गई थी, जिससे विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। घटनास्थल के आसपास मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान विवेचना में शामिल नहीं किए गए। आरोपों को सिद्ध करने के लिए प्रस्तुत साक्ष्य अपर्याप्त हैं। इस आधार पर अदालत ने सपा विधायक और उनके भाई को दोषमुक्त कर दिया।
लोअर कोर्ट का फैसला पलटा
ज्ञात हो कि 24 मई 2023 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट / एमपी-एमएलए कोर्ट ने विधायक प्रभु नारायण यादव और अनिल यादव को दोषी करार दिया था। लेकिन बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने प्रभावी ढंग से बहस करते हुए उस फैसले की कानूनी खामियां उजागर कीं। न्यायालय ने उनकी दलीलों को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर उचित पाया और पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 2015 के जिला पंचायत चुनाव से जुड़ा है। चहनियां क्षेत्र के सेक्टर-4 में सपा विधायक प्रभुनारायण यादव के भाई अनिल सिंह यादव बतौर प्रत्याशी मैदान में थे। चुनाव के दौरान सपा और प्रतिद्वंदी प्रत्याशी प्रभु चौहान के समर्थकों के बीच टकराव हो गया था।
बाद में तत्कालीन सकलडीहा विधायक और वर्तमान भाजपा नेता सुशील सिंह की शिकायत पर मुकदमा दर्ज हुआ। इसमें प्रभु नारायण यादव और अनिल यादव पर रास्ता रोकने, बलवा करने और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए गए।
सपा खेमे में खुशी
कोर्ट के फैसले के बाद सपा समर्थकों और कार्यकर्ताओं में संतोष और राहत का माहौल है। वहीं, मामला एक बार फिर से राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। प्रभु नारायण यादव ने अदालत के फैसले को न्याय की जीत बताया है और कहा कि झूठे मुकदमों से सच्चाई को रोका नहीं जा सकता।
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