पूर्व राज्यपाल Satyapal Malik का निधन: जानिए, छात्र नेता से जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल तक का राजनीतिक सफर

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Satyapal Malik

Satyapal Malik: भारत के वरिष्ठ राजनेता और पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का 5 अगस्त को दोपहर 1 बजे दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में निधन हो गया। वे 79 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। मई 2025 से ही वे अस्पताल में भर्ती थे और गंभीर किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे।

मलिक के निधन से राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विपक्षी नेताओं समेत कई दिग्गज नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

इलाज के दौरान अफवाहें और स्पष्टीकरण

बीते महीनों में सत्यपाल मलिक के स्वास्थ्य को लेकर कई बार अफवाहें उड़ी थीं, लेकिन उनके X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट से समय-समय पर उनका स्वास्थ्य अपडेट शेयर किया जाता रहा। जुलाई में एक वीडियो जारी कर उन्होंने मौत की झूठी खबरों का खंडन किया था। लेकिन 5 अगस्त को उन्होंने अंतिम सांस ली।

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के रूप में ऐतिहासिक कार्यकाल

अगस्त 2018 से अक्टूबर 2019 तक मलिक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे। पुलवामा हमला (14 फरवरी 2019) और अनुच्छेद 370 का ऐतिहासिक निष्कासन (5 अगस्त 2019) उन्हीं के कार्यकाल में हुआ। वे उस समय राज्य में शीर्ष संवैधानिक पद पर थे, जब जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया था।

राजनीतिक यात्रा: चरण सिंह के शिष्य से लेकर बीजेपी नेता तक

  • 1946 में उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के हिसावदा गांव में जन्मे मलिक के पिता स्वतंत्रता सेनानी थे।
  • 1967 में छात्र राजनीति से राजनीतिक सफर की शुरुआत की। मेरठ कॉलेज में छात्र संघ अध्यक्ष चुने गए।
  • 1974 में भारतीय क्रांति दल से विधायक बने।
  • 1980 में चरण सिंह ने उन्हें राज्यसभा भेजा।
  • 1984 में कांग्रेस में शामिल होकर दोबारा राज्यसभा गए।
  • 1989 में जनता दल से अलीगढ़ से लोकसभा जीती, वीपी सिंह सरकार में मंत्री बने।
  • 1996 में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए।
  • 2004 में बीजेपी में आए और चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा।

जाट राजनीति और बीजेपी में भूमिका

मलिक को जाट समुदाय का बड़ा चेहरा माना जाता था। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा की राजनीति में जाट मतदाताओं को बीजेपी के करीब लाने में अहम भूमिका निभाई। बीजेपी किसान मोर्चा में उनकी सक्रियता और किसानों के मुद्दों पर आवाज उठाने के कारण उन्हें पार्टी में खास जगह मिली।

गवर्नर के रूप में कई राज्यों की जिम्मेदारी

  • बिहार के राज्यपाल (2017)
  • जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल (2018-2019)
  • गोवा और मेघालय में भी राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला।

बेबाक बयानों के लिए चर्चित रहे

राजनीति में सक्रिय रहते हुए और रिटायरमेंट के बाद भी सत्यपाल मलिक सरकार की नीतियों पर खुलकर बोलते रहे। जम्मू-कश्मीर में भ्रष्टाचार और पुलवामा हमले की जांच को लेकर उनके बयान कई बार विवादों में रहे। बावजूद इसके उन्होंने कभी पीछे हटना नहीं सीखा।

अंतिम विदाई

परिवार के अनुसार, मलिक का अंतिम संस्कार 6 अगस्त को दिल्ली में किया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर को आमजन के अंतिम दर्शन के लिए कुछ घंटों तक राम मनोहर लोहिया अस्पताल परिसर में रखा जाएगा।

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