
Chandauli News: चंदौली जिले के स्पेशल जज एससी-एसटी राम बाबू यादव की अदालत ने शुक्रवार को 20 साल पुराने दलित उत्पीड़न मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आठ दोषियों को 10-10 साल का कठोर कारावास और ₹60,000-₹60,000 का अर्थदंड देने का आदेश दिया। जुर्माना न देने पर सभी को छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
20 साल पुराना मामला
यह मामला 26 मार्च 2005 का है, जब धीना थाने में जान से मारने का प्रयास और दलित उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में पुलिस ने कंजेहरा गांव के उपेंद्र यादव, राम चरन, रवींद्र, रामअवधेश यादव, रामआशीष यादव, राम बचन यादव, राम अवध और संजय यादव को मुख्य आरोपी बनाया था।
गिरफ्तारी और सुनवाई
पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान धीना थाने के पैरोकार मनीष कुमार गुप्ता ने कोर्ट में पुख्ता सबूत पेश किए।
अभियोजन पक्ष से एडीजीसी जय प्रकाश सिंह ने प्रभावी पैरवी की, जबकि मानिटरिंग सेल प्रभारी निरीक्षक मुकेश तिवारी ने केस की निगरानी की। अभियोजन पक्ष के ठोस तर्कों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया।
अदालत का आदेश
कोर्ट ने सभी दोषियों को एससी-एसटी एक्ट और आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत दोषी मानते हुए सजा सुनाई। अदालत ने साफ कहा कि जुर्माना न भरने की स्थिति में उन्हें छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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