Fatehpur Tomb Controversy: फतेहपुर में 500 साल पुराने मकबरे पर क्यों मचा बवाल? जानिए पूरी कहानी

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Fatehpur Tomb Controversy

Fatehpur Tomb Controversy: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सोमवार को मकबरे को लेकर दो समुदायों के बीच बड़ा बवाल हो गया। विवाद इस कदर बढ़ा कि मकबरे के अंदर और बाहर जमकर तोड़फोड़ हुई। फिलहाल इलाके में शांति है, लेकिन प्रशासन ने एहतियात के तौर पर भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया है। विवादित स्थल पर तीन परत की बांस-बल्ली बैरिकेडिंग, गलियों में पुलिस की बेरिकेडिंग और मौके पर पीएसी की तैनाती की गई है। चलिए जानते हैं, फतेहपुर में 500 साल पुराने मकबरे पर क्यों बवाल मचा है।

FIR में 160 लोगों पर केस, नेताओं के भी नाम

सोमवार को हुई घटना को लेकर पुलिस ने 10 नामजद और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। नामजद आरोपियों में एक स्थानीय पार्षद, एक जिला पंचायत सदस्य और हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोग शामिल हैं। हालांकि, अभी तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में जुटी हैं।

विवाद कैसे भड़का?

हिंदू पक्ष का दावा है कि फतेहपुर के आबूनगर के रेडइया इलाके में स्थित नवाब अब्दुल समद मकबरे के अंदर पहले ठाकुर जी का मंदिर था। उनका कहना है कि मकबरे में त्रिशूल और कमल जैसे हिंदू धार्मिक प्रतीक हैं, जो किसी मकबरे में नहीं पाए जाते। इसी आधार पर उन्होंने 11 अगस्त को पूजा करने का ऐलान किया था।

प्रशासन ने एहतियातन मकबरे को बांस बल्लियों से घेर दिया था, लेकिन सोमवार सुबह करीब 11 बजे हजारों की संख्या में लोग जमा हुए और बैरिकेडिंग तोड़कर अंदर घुस गए। इसके बाद मकबरे में तोड़फोड़, नारेबाजी और भगवा झंडा फहराने की घटनाएं हुईं।

पथराव और अफरातफरी

मकबरे में तोड़फोड़ से नाराज मुस्लिम पक्ष ने पथराव कर दिया, जिससे हालात बेकाबू हो गए। प्रशासन ने किसी तरह भीड़ को तितर-बितर किया और स्थिति को नियंत्रण में लाया। मौके पर प्रयागराज जोन के एडीजी को भेजा गया, जिन्होंने घटनास्थल का जायजा लिया।

500 साल पुराना ऐतिहासिक मकबरा

मकबरे के मुतवल्ली मोहम्मद नफीस के मुताबिक, यह मकबरा करीब 500 साल पुराना है और इसे बादशाह अकबर के पोते ने बनवाया था। इसमें अबू मोहम्मद और अबू समद की कब्रें हैं। राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर मकबरे के ऐतिहासिक स्वरूप की रक्षा की अपील की है।

राजनीति भी गरमाई

घटना पर राजनीति भी तेज हो गई है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्ष से अपील की है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश न करें। वहीं, बीएसपी प्रमुख मायावती ने सरकार से कड़ी कार्रवाई करने और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की मांग की है।

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