
Tej Pratap Yadav AIMIM Alliance: घर फूटे तो गंवार लुटे- यह कहावत इन दिनों बिहार की राजनीति और खासकर लालू प्रसाद यादव के परिवार पर सटीक बैठती दिख रही है। राज्य की राजनीति में इन दिनों चले आ रहे घटनाक्रमों ने महागठबंधन खेमे और जनता को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या RJD सुप्रीमो लालू यादव का कुनबा आपसी खींचतान और बगावत की तरफ बढ़ चला है?
तेजप्रताप यादव—जो कभी अपने छोटे भाई तेजस्वी को अर्जुन मानते थे- आज उन्हीं के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। हाल ही में तेजप्रताप ने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ पर तीखा हमला बोलते हुए इसे ‘बेकार’ और ‘असरहीन’ करार दिया। उनका कहना है कि यह यात्रा जनता को गुमराह करने वाली है और इसका असली फायदा सत्ता पक्ष यानी बीजेपी को मिलेगा।
यही नहीं, तेजप्रताप ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर भी आरोप लगाया कि वे बिहार के असली मुद्दों- शिक्षा, स्वास्थ्य और बेरोजगारी- की अनदेखी कर रहे हैं और केवल सतही बातों में जनता का ध्यान बंटा रहे हैं।
तेजप्रताप की नाराजगी यहीं नहीं रुकी। अब उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM पार्टी से गठबंधन की घोषणा कर दी है, जिससे बिहार की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। याद दिला दें, 2020 के विधानसभा चुनाव में AIMIM ने पांच सीटें जीतकर RJD के समीकरण को तगड़ा झटका दिया था। अब अगर तेजप्रताप और ओवैसी मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो महागठबंधन और खासकर MY समीकरण (मुस्लिम-यादव वोट बैंक) की राजनीति को बड़ा नुकसान हो सकता है।
राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं- क्या तेजप्रताप, परिवार और पार्टी से अलग होकर RJD और महागठबंधन को नई चुनौती देंगे? क्या लालू परिवार की यह फूट आगामी चुनावों में RJD के लिए घातक साबित होगी?
बिहार की सियासी जमीन पर तेजप्रताप का यह नया खेल कब, कैसे और कितना असर करेगा, यह तो वक्त ही बताएगा; मगर फिलहाल यह साफ है कि लालू परिवार में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है।
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