Bihar Election 2025: PK भी मैदान में! बिहार की राजनीति में तीन-तरफा रथयुद्ध, जनता के मूड से बनेगा समीकरण

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Bihar Election 2025

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, प्रदेश की सियासत में यात्राओं की राजनीति जोर पकड़ने लगी है। महागठबंधन से लेकर एनडीए और तीसरे मोर्चे तक—हर राजनीतिक दल अपने-अपने अंदाज़ में यात्राओं को जनता से संवाद और वोट बैंक मज़बूत करने का साधन बना रहे हैं।

महागठबंधन की सियासी चाल – ‘संदेश रथ’

कांग्रेस नेता राहुल गांधी इन दिनों “वोटर अधिकार यात्रा” पर हैं। खास बात यह है कि इस यात्रा में उनके साथ तेजस्‍वी यादव, मुकेश साहनी और भाकपा-माले नेता दीपंकर भट्टाचार्य भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। इससे पहले राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा को कांग्रेस ने ऐतिहासिक बताया था और दावा किया था कि इस यात्रा का असर छह राज्यों में पार्टी के वोट प्रतिशत पर साफ दिखा। अब उसी तर्ज पर राहुल ने बिहार की ज़मीन पर अपनी नई यात्रा शुरू की है।

इसी क्रम में पटना से RJD ने तेजस्‍वी संदेश रथ को भी रवाना किया। राबड़ी देवी के आवास 10, सर्कुलर रोड से लालू प्रसाद यादव ने खुद इस रथ को हरी झंडी दिखाई। आरजेडी का दावा है कि यह रथ बिहार के कोने-कोने तक जाएगा और जनता से सीधा संवाद करेगा।

एनडीए की तैयारी – नीतीश का ‘निश्चय रथ’

महागठबंधन की यात्रा पॉलिटिक्स के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी पीछे नहीं हैं। चर्चा तेज है कि हरियाणा से तैयार होकर आया “निश्चय रथ” अब नीतीश कुमार का चुनावी हथियार बनेगा। इस रथ के ज़रिए वे न केवल चुनाव प्रचार करेंगे, बल्कि जनता से संवाद और विकास कार्यों की समीक्षा भी करेंगे।

जेडीयू ने इसके लिए 100 से अधिक टीमें भी मैदान में उतारी हैं। यह टीमें अलग-अलग जाति और वर्ग से जुड़कर फीडबैक इकट्ठा करेंगी और वोट बैंक मज़बूत करने की कोशिश करेंगी। नीतीश कुमार पहले भी 2005 के बाद कई यात्राओं से जनता के बीच उतरे थे और जानकार मानते हैं कि उनकी ये यात्राएं सिर्फ चुनावी रैली भर नहीं, बल्कि विकास कार्यों के मूल्यांकन और जनता से संवाद का बड़ा माध्यम बनी थीं।

तीसरा मोर्चा – प्रशांत किशोर की 3 साल पुरानी यात्रा

बिहार की राजनीति में केवल महागठबंधन और एनडीए ही नहीं, बल्कि प्रशांत किशोर (PK) भी अपनी जनसुराज यात्रा से लगातार चर्चा में बने हुए हैं। पिछले तीन वर्षों से वे राज्यभर में पदयात्रा कर रहे हैं और लगातार जनता से जुड़ाव बना रहे हैं। उनकी यह मुहिम बिहार में तीसरे विकल्प को जन्म देती दिख रही है।

क्षेत्रवार विश्लेषण – किसकी यात्रा कहाँ असरदार?

उत्तर बिहार (सीमांचल व मिथिलांचल)
यह क्षेत्र मुस्लिम और यादव मतदाताओं के लिए अहम माना जाता है। महागठबंधन की यात्राएं यहाँ खास असर डाल सकती हैं। तेजस्‍वी और राहुल गांधी की जोड़ी इस इलाक़े में महागठबंधन का वोट बैंक और मज़बूत करने की कोशिश में है।

मगध और दक्षिण बिहार
यहाँ नीतीश कुमार का पारंपरिक वोट बैंक और उनकी सुशासन की छवि अब भी असरदार है। निश्चय रथ के ज़रिए वे विकास कार्यों का रिपोर्ट कार्ड दिखाकर जनता को दोबारा साधने की कोशिश करेंगे।

बिहार का मध्य क्षेत्र (पटना, नालंदा, भोजपुर)
यह इलाका हमेशा से चुनावी संग्राम का केंद्र रहा है। यहाँ महागठबंधन और एनडीए दोनों की कड़ी टक्कर है। तेजस्‍वी का युवा नेतृत्व और नीतीश का प्रशासनिक अनुभव, जनता के सामने दो अलग-अलग विकल्प पेश कर रहे हैं।

कोशी-सीमांचल
यह क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षा झेलता आया है। राहुल गांधी और तेजस्‍वी की यात्राएं यहाँ भावनात्मक मुद्दों पर असर डाल सकती हैं। वहीं, मुकेश साहनी की उपस्थिति इस इलाक़े में एनडीए और महागठबंधन दोनों के वोट समीकरण बिगाड़ सकती है।

प्रशांत किशोर का प्रभाव
पीके की जनसुराज यात्रा ने गाँव-गाँव में संगठन खड़ा किया है। सीमांचल और ग्रामीण इलाकों में उनकी पकड़ धीरे-धीरे मज़बूत हो रही है। यही वजह है कि विशेषज्ञ 2025 में त्रिशंकु बहुमत की संभावना से इनकार नहीं कर रहे।

स्पष्ट है कि बिहार की राजनीति अब “यात्राओं” के इर्द-गिर्द घूम रही है। महागठबंधन के लिए संदेश रथ और वोटर अधिकार यात्रा, एनडीए के लिए निश्चय रथ, और तीसरे मोर्चे के लिए पीके की जनसुराज यात्रा- सभी अपने-अपने तरीके से जनता तक पहुँचने की कवायद कर रहे हैं। अब देखना दिलचस्‍प होगा कि बिहार का मतदाता 2025 में किसकी यात्रा को असली जनादेश में तब्दील करता है।

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