
Bihar Chunav 2025: जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नज़दीक आ रहे हैं, राजनीतिक पाला-बदल की कवायद तेज़ होती जा रही है। इस बीच सबसे बड़ी चर्चा यह है कि क्राइम पर जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब उन चेहरों को भी अपने खेमे में जगह दे रही है, जो अपराध जगत से गहरे जुड़े रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे बीजेपी की “वाशिंग मशीन” सक्रिय होने के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें बाहुबलियों और कुख्यात नेताओं को ‘मिस्टर क्लीन’ बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
लखीसराय का आतंक’ प्रह्लाद यादव की एंट्री पर सस्पेंस
सबसे चर्चित नाम है लखीसराय के वर्तमान RJD विधायक प्रह्लाद यादव का। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कभी इन्हें “लखीसराय का आतंक” कहा था, लेकिन अब चर्चा है कि प्रह्लाद यादव भाजपा में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। बताया जाता है कि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने खुद उन्हें भाजपा में लाने की कोशिश की थी और उन्हें सूर्यगढ़ा सीट से टिकट दिलाने का वादा भी किया था।
हालांकि, ललन सिंह और विजय सिन्हा के बीच चल रही सियासी खींचतान के चलते प्रह्लाद यादव की एंट्री पर फिलहाल सस्पेंस बना हुआ है।
बाहुबली राजबल्लभ यादव की पत्नी भी भाजपा खेमे में?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गया दौरे में एक बड़ा संकेत देखने को मिला। मंच पर RJD के दो विधायक – विभा देवी और प्रकाश वीर – पीएम मोदी के साथ खड़े दिखे।
विभा देवी वही विधायक हैं, जो नामचीन बाहुबली और रेप केस में सजायाफ्ता रह चुके राजबल्लभ यादव की पत्नी हैं। हाल ही में हाईकोर्ट से बरी होने के बाद राजबल्लभ यादव अपने लिए सुरक्षित राजनीतिक ज़मीन तलाश रहे हैं। चर्चाओं के मुताबिक, विभा देवी जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकती हैं।
सुनील पांडे और बेटे की भाजपा में एंट्री
अगला बड़ा नाम है बाहुबली सुनील पांडे का। अगस्त 2024 के उपचुनाव के दौरान वे भाजपा में शामिल हुए। पार्टी की सदस्यता उन्हें प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने दिलाई थी। इसके साथ ही उनके बेटे संदीप पांडे भी भाजपा में शामिल हो गए।
दरअसल, तरारी विधानसभा सीट से संदीप पांडे को उम्मीदवार बनाने की रणनीति के तहत यह कदम उठाया गया और उपचुनाव में भाजपा को इसका फायदा भी मिला।
जीरो टॉलरेंस पर उठते सवाल
बीजेपी लंबे समय से अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात करती रही है। लेकिन अब जब कुख्यात और बाहुबलियों को पार्टी में शामिल कराया जा रहा है, तब इस नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्ष का तंज है कि भाजपा सत्ता की खातिर किसी भी हद तक जा सकती है और उसकी “वाशिंग मशीन” में हर अपराधी एक क्लिक में ‘निर्दोष’ बन जाता है।
स्पष्ट है कि बिहार में चुनावी मौसम के साथ-साथ सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। बाहुबली नेताओं की एंट्री ने भाजपा के जीरो टॉलरेंस वाले नैरेटिव पर सीधा प्रहार किया है। अब देखना होगा कि जनता इसे किस नजरिए से देखती है – क्या अपराध के पुराने चेहरे सच में ‘धुल’ पाएंगे, या फिर यह चाल भाजपा के लिए चुनावी नुकसान का कारण बन जाएगी।
ALSO READ – Bihar Election 2025: PK भी मैदान में! बिहार की राजनीति में तीन-तरफा रथयुद्ध, जनता के मूड से बनेगा समीकरण