
Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कांग्रेस ने चुनावी शतरंज की बिसात पर नया मोहरा चल दिया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा 26 अगस्त को सुपौल में आयोजित ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में राहुल गांधी के साथ हिस्सा लिया। अगले दिन 27 अगस्त को वह मिथिलांचल के सीतामढ़ी पहुंचेंगी और प्रसिद्ध माता जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी।
राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि प्रियंका गांधी का यह दौरा कांग्रेस की ‘दोहरी रणनीति’ का हिस्सा है—जहां एक ओर राहुल गांधी अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्गों को साध रहे हैं, वहीं प्रियंका हिंदू और महिला वोटरों को जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।
महिला वोटरों पर खास फोकस
प्रियंका का कार्यक्रम हरितालिका तीज के दिन रखा गया। यह पर्व बिहार की महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कांग्रेस इसे महिला वोट बैंक को आकर्षित करने का सुनहरा मौका मान रही है। हाल ही में पार्टी ने महिलाओं के लिए ₹2500 देने का वादा किया था। ऐसे में प्रियंका का यह दौरा कांग्रेस की महिला मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति को और धार देगा।
सॉफ्ट हिंदुत्व का कार्ड
प्रियंका का जानकी मंदिर में दर्शन करना कांग्रेस की सॉफ्ट हिंदुत्व रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। दरअसल, मिथिलांचल के सीतामढ़ी, दरभंगा और मधुबनी जैसे जिलों में 46 विधानसभा सीटें हैं और यहां धार्मिक भावनाओं का खासा प्रभाव है।
बीजेपी पहले ही पुनौराधाम मंदिर परियोजना पर बड़ा दांव चल चुकी है। अब प्रियंका गांधी के इस दौरे को बीजेपी के हिंदुत्व नैरेटिव को टक्कर देने की कांग्रेस की चाल बताया जा रहा है।
राहुल और प्रियंका की ‘डबल स्ट्रेटेजी’
- राहुल गांधी का फोकस अल्पसंख्यक और दलित वोटरों पर है।
- प्रियंका गांधी महिला और हिंदू वोटरों को साधने में जुटी हैं।
- यह ‘डबल स्ट्रेटेजी’ कांग्रेस की पुरानी छवि को बदलकर नई दिशा देने की कोशिश है।
कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौतियां
हालांकि कांग्रेस का बिहार में जनाधार कमजोर है। महागठबंधन में आरजेडी की भूमिका हावी रहती है। 2020 में मिथिलांचल की 46 सीटों में से 31 सीटें एनडीए के खाते में गई थीं। ऐसे में प्रियंका का यह दौरा कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह तो भरेगा, लेकिन एनडीए के मजबूत गठजोड़ और बीजेपी-जेडीयू की पकड़ को चुनौती देना आसान नहीं होगा।
सियासी रिस्क या मास्टरस्ट्रोक?
प्रियंका गांधी का यह मंदिर दौरा और तीज पर उपस्थिति कांग्रेस के लिए राजनीतिक रिस्क भी है। बीजेपी इसे ‘नकली हिंदुत्व’ कहकर निशाना बना सकती है, जबकि अल्पसंख्यक वोटर भी असहज हो सकते हैं। लेकिन दूसरी तरफ यह कांग्रेस को नए सिरे से हिंदू और महिला मतदाताओं में पैठ बनाने का मौका भी दे सकता है।
नतीजा क्या होगा?
फिलहाल कहना मुश्किल है कि प्रियंका गांधी का यह दौरा कांग्रेस के लिए ‘गेमचेंजर’ साबित होगा या महज एक सियासी शोर बनकर रह जाएगा। लेकिन इतना तय है कि मिथिलांचल से प्रियंका का यह सियासी संदेश बिहार चुनाव 2025 की दिशा और दशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
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