
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, प्रदेश की सियासत गरमाती जा रही है। इस बार मुकाबला केवल NDA बनाम महागठबंधन का ही नहीं बल्कि तीसरे विकल्प जन सुराज का भी है, जिसकी कमान प्रशांत किशोर (PK) ने संभाल रखी है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बिहार की राजनीति में PK का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, और इसकी सबसे बड़ी वजह उनका नया मास्टरप्लान है- लालू यादव के परंपरागत ‘MY समीकरण’ (मुस्लिम-यादव) में सेंधमारी।
मुस्लिम सम्मेलन से बदली हवा
हाल ही में मोतिहारी के बापू सभागार में आयोजित मुस्लिम एकता सम्मेलन ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी। इस सम्मेलन में मुस्लिम समुदाय की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। PK ने मंच से भावनात्मक अपील करते हुए कहा-
“हमें आपका वोट नहीं चाहिए, हमें आपका साथ चाहिए।”
उनका यह बयान साफ इशारा था कि वह मुस्लिम समाज से महज वोट नहीं, बल्कि स्थायी राजनीतिक समर्थन चाहते हैं।
लालू यादव और मुस्लिम नेताओं पर सीधा हमला
प्रशांत किशोर ने अपने भाषण में मुस्लिम समाज के पारंपरिक नेताओं को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा- मुस्लिम नेताओं ने ही अपने समुदाय को सबसे ज्यादा ठगा है।
इसके साथ ही PK ने लालू प्रसाद यादव पर भी हमला बोलते हुए कहा कि लालू ने दशकों तक केवल बीजेपी का डर दिखाकर मुसलमानों से वोट लिया और उन्हें असली राजनीतिक भागीदारी से वंचित रखा।
RJD के लिए बड़ी चुनौती
बिहार की राजनीति में अब तक लालू यादव का सबसे बड़ा हथियार ‘MY समीकरण’ रहा है। यादव और मुस्लिम वोट बैंक के सहारे RJD ने लंबे समय तक सत्ता पर दबदबा बनाए रखा। लेकिन अगर प्रशांत किशोर मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने में सफल हो जाते हैं, तो यह RJD के लिए सीधा झटका होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मुस्लिम वोटर तीसरे विकल्प की ओर मुड़ते हैं, तो बिहार की राजनीति का पूरा संतुलन बदल सकता है।
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NDA और महागठबंधन में बेचैनी
PK के इस कदम ने दोनों बड़े गठबंधनों- NDA और महागठबंधन को परेशान कर दिया है। NDA को डर है कि अगर जन सुराज ने सवर्ण और मुस्लिम दोनों वर्गों में पैठ बना ली तो उसकी रणनीति गड़बड़ा सकती है। वहीं महागठबंधन के लिए यह सीधा खतरा है क्योंकि उनके पारंपरिक वोट बैंक पर ही PK ने दस्तक दी है।
PK की अलग शैली
प्रशांत किशोर पारंपरिक राजनीति से अलग जनता के बीच जाकर जन सुराज अभियान चला रहे हैं। वे गांव-गांव जाकर जनता से संवाद कर रहे हैं और राजनीति में उनकी सक्रिय भागीदारी की बात कर रहे हैं। यही वजह है कि उनका प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है।
बड़ा सवाल
- अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशांत किशोर सचमुच लालू यादव का ‘MY समीकरण’ तोड़ पाएंगे?
- क्या मुस्लिम समाज परंपरागत राजनीति छोड़कर PK के साथ खड़ा होगा?
- क्या जन सुराज बिहार की राजनीति का तीसरा ध्रुव बनेगा?
इन सवालों का जवाब तो आने वाले चुनाव में मिलेगा, लेकिन इतना तय है कि प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
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