
Bihar Harsidhi Vidhansabha Election 2025: हरसिद्धि विधानसभा चुनाव 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए बिगुल बज चुका है और पूरे राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बार सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाली सीटों में से एक है हरसिद्धि विधानसभा सीट, जो पूर्वी चंपारण जिले में आती है। यहां का राजनीतिक इतिहास बेहद रोचक रहा है और अबकी बार मुकाबला और भी दिलचस्प होने वाला है।
1951 से अब तक का सफर: कांग्रेस से शुरू, बीजेपी-राजद तक पहुंचा मुकाबला
- हरसिद्धि विधानसभा सीट का गठन साल 1951 में हुआ था। अब तक यहां 17 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं।
- शुरुआती दौर में इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा। पहले 10 चुनावों में से 8 पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया।
- 1967 में वाम दल और 1977 में जनता पार्टी ने कांग्रेस की इस बढ़त को तोड़ा।
- 1990 में जनता दल और 2000 में समता पार्टी ने जीत दर्ज की।
- 2005 में हुए दोनों विधानसभा चुनावों (फरवरी और अक्टूबर) में लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) विजयी रही।
2008 के बाद से बदला समीकरण
- साल 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिश के बाद यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित कर दी गई।
- इसके बाद अब तक 3 बार चुनाव हो चुके हैं। इन चुनावों में मुख्य रूप से बीजेपी और राजद आमने-सामने रहे। दिलचस्प बात यह है कि राजद ने हर बार नया चेहरा मैदान में उतारा।
हिदायतुल्लाह खान से लेकर कृष्णानंदन पासवान तक
हरसिद्धि की राजनीति में मोहम्मद हिदायतुल्लाह खान का नाम बेहद अहम है। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चार बार (1972, 1980, 1985 और 1990) जीत दर्ज की। मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के रूप में अपनी पहचान बनाई। हाल के वर्षों में यहां बीजेपी के कृष्णानंदन पासवान ने मजबूत पकड़ बनाई। उन्होंने 2010 और 2020 में जीत हासिल की। जबकि 2015 में राजद के राजेंद्र कुमार से हार का सामना करना पड़ा।
यानी, इस सीट पर जदयू की ‘किंगमेकर’ वाली भूमिका भी साफ दिखी..
2010 और 2020 में वह बीजेपी के साथ रही,
2015 में राजद गठबंधन के साथ।
लोकसभा चुनाव में महागठबंधन को बढ़त
2024 लोकसभा चुनाव में पूर्वी चंपारण से बीजेपी के दिग्गज राधा मोहन सिंह सातवीं बार सांसद तो बने, लेकिन हरसिद्धि विधानसभा खंड में उन्हें वीआईपी (विकासशील इंसान पार्टी) के राजेश कुशवाहा से पीछे रहना पड़ा।
यह नतीजा महागठबंधन के लिए बेहद उत्साहजनक माना जा रहा है। इसकी वजह है यहां का मुस्लिम वोट बैंक। 2024 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिम वोटर्स ने एकजुट होकर महागठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया।
वोटर्स का गणित
2020 चुनाव में कुल 2.67 लाख वोटर्स पंजीकृत थे।
इनमें से-
- 43,000 से ज्यादा SC वोटर
- 50,000 मुस्लिम वोटर शामिल थे।
- मतदान प्रतिशत मात्र 63.56% रहा, जो अब तक का सबसे कम आंकड़ा था।
- 2024 तक मतदाताओं की संख्या बढ़कर 2.78 लाख हो गई है।
2025 में किसकी जीत?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हरसिद्धि सीट पर अब मुकाबला एकतरफा नहीं रहा।
बीजेपी ने पिछले सालों में यहां अपनी जड़ें गहरी की हैं, लेकिन महागठबंधन को हालिया लोकसभा चुनाव से मिली ऊर्जा चुनावी समीकरण बदल सकती है।
सबसे अहम भूमिका मुस्लिम वोटर्स की होगी
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर मुस्लिम मतदाता एकजुट रहे, तो महागठबंधन की राह आसान हो सकती है।
अन्यथा, बीजेपी और जदयू की गठजोड़ रणनीति बाज़ी पलट सकती है।
हरसिद्धि विधानसभा सीट 2025 का चुनाव त्रिकोणीय मुकाबला लेकर आ सकता है। जहां बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है, वहीं राजद और महागठबंधन मुस्लिम वोट बैंक के सहारे जीत का दावा ठोक रहे हैं। जदयू की स्थिति फिर से ‘किंगमेकर’ जैसी दिख रही है। इस बार देखना दिलचस्प होगा कि हरसिद्धि की जनता किसके पक्ष में फैसला सुनाती है।
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