Bihar Election 2025: चिराग-कुशवाहा की घर वापसी से NDA मजबूत, क्या महागठबंधन बचा पाएगा अपना गढ़

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Bihar Election 2025

Bihar Election 2025: बिहार की राजनीति एक बार फिर गरम है। 2025 विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, पुराने समीकरण बदल रहे हैं और नए गठजोड़ बन रहे हैं। साल 2020 के चुनाव में महागठबंधन ने शुरुआती चरण में जबरदस्त प्रदर्शन कर सत्ता की दावेदारी मजबूत की थी, लेकिन अब हालात पहले जैसे नहीं हैं। इस बार मैदान में एनडीए को अतिरिक्त सहारा मिला है— चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) और उपेंद्र कुशवाहा की RLSP (अब RLJD)।

2020 में महागठबंधन की बड़ी बढ़त

2020 में तीन चरणों में संपन्न हुए चुनाव में महागठबंधन ने पहले चरण की 71 सीटों में से 48 सीटें जीत ली थीं। इन 48 सीटों में RJD को 33, कांग्रेस को 8 और CPI-ML को 7 सीटें मिली थीं। वहीं एनडीए महज 21 सीटों पर सिमट गया था। रोहतास, बक्सर, कैमूर, औरंगाबाद, जहानाबाद और अरवल जैसे छह जिलों में तो एनडीए का खाता तक नहीं खुला था।

LJP और RLSP की वजह से हारे कई सीटें

उस वक्त चिराग पासवान की LJP और उपेंद्र कुशवाहा की RLSP, एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़े थे। नतीजा यह रहा कि महागठबंधन की जीत की 48 सीटों में से करीब 20 सीटें ऐसी थीं, जहां अंतर LJP के मिले वोटों से भी कम था। इतना ही नहीं, तीन सीटों पर LJP दूसरे नंबर पर रही थी। RLSP ने भी कई जगहों पर एनडीए को नुकसान पहुंचाया। यह साफ है कि अगर दोनों दल एनडीए के साथ रहते तो परिणाम पूरी तरह बदल सकते थे।

2025 में तस्वीर बदली

अब 2025 में तस्वीर अलग है। LJP और RLJD दोनों ही एनडीए के साथ खड़े हैं। इससे एनडीए की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। वहीं महागठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने गढ़ को बचाने की है। क्योंकि 2020 में जिस इलाके में महागठबंधन को 70% सीटें मिली थीं, उसी इलाके में अब चिराग और कुशवाहा एनडीए के लिए गेमचेंजर साबित हो सकते हैं।

NDA की रणनीति और महागठबंधन की चिंता

जेडीयू और बीजेपी को भरोसा है कि चिराग और कुशवाहा की वापसी से इस बार दक्षिण और दक्षिण-पूर्व बिहार में उनकी पकड़ मजबूत होगी। वहीं महागठबंधन के सामने सवाल है— क्या वे 2020 जैसा प्रदर्शन दोहरा पाएंगे? या फिर उन्हें अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करना होगा?

बिहार का चुनावी रणभेरी इस बार और ज्यादा दिलचस्प होने वाला है। जहां एक ओर एनडीए अपने पुराने सहयोगियों के सहारे पिछली बार की हार की भरपाई करना चाहता है, वहीं महागठबंधन को अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए नई चालें चलनी होंगी। नतीजा चाहे जो भी हो, लेकिन यह तय है कि 2025 का चुनाव बिहार की सियासत को एक बार फिर नई दिशा देगा।

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