
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए (NDA) गठबंधन में आखिरकार सीटों का बंटवारा तय हो गया है। लेकिन सीट बंटवारे के ऐलान के तुरंत बाद ही सहयोगी दलों के बीच मतभेद की सुगबुगाहट शुरू हो गई। सबसे पहले नाराजगी का सुर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की तरफ से सुनाई दिया। मांझी ने कहा कि उनकी पार्टी ने 15 सीटों की मांग की थी, लेकिन उन्हें सिर्फ 6 सीटें दी गई हैं। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरी तरह से हैं और गठबंधन के फैसले का सम्मान करते हैं।
सीट बंटवारे के बाद बदला सुर
सीटों की घोषणा के बाद रविवार शाम एनडीए के सभी बड़े नेताओं नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी ने एक साथ ट्वीट करते हुए कहा कि “NDA में सीटों का बंटवारा सौहार्दपूर्ण माहौल में तय हुआ है।”
लेकिन कुछ ही घंटे बाद मांझी का बयान सामने आया- ‘हमें 6 सीटें देकर कम आंका गया है। इसका खामियाजा NDA को भुगतना पड़ सकता है।’
मांझी के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। विपक्ष ने तुरंत तंज कसना शुरू किया कि एनडीए में सबकुछ ठीक नहीं है। हालांकि बाद में मांझी ने अपने सुर नरम करते हुए कहा — ‘हमें जितनी सीटें मिली हैं, उसी में खुश हैं। प्रधानमंत्री मोदी पर हमें पूरा भरोसा है।’
पीएम मोदी पर जताया भरोसा
मांझी ने अपने बयान में कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान भी उनकी पार्टी को वादे से कम सीटें मिली थीं, फिर भी उन्होंने NDA का साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा – हमारा समाज सादगी से जीने वाला है। हमें जो मिला, उसी में खुश हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने गया और बिहार के विकास के लिए जो किया है, उस पर हमें गर्व है।
NDA का सीट बंटवारा इस प्रकार
- भाजपा (BJP): 101 सीटें
- जदयू (JDU): 101 सीटें
- लोजपा (रा) – चिराग पासवान: 29 सीटें
- हम (जीतन राम मांझी): 6 सीटें
राष्ट्रीय लोक मोर्चा: 6 सीटें
पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को और दूसरे चरण का 11 नवंबर को होगा। मतगणना 14 नवंबर को निर्धारित है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि जीतन राम मांझी की यह “नाराजगी और फिर संतुष्टि” की रणनीति पुराने अनुभव पर आधारित है। वे गठबंधन के भीतर दबाव बनाकर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करना चाहते हैं। हालांकि उनके ताजा बयान से यह साफ है कि वे किसी तरह का टकराव नहीं चाहते और NDA के साथ मजबूती से बने रहना चाहते हैं।
सीट बंटवारे के बाद भले ही NDA नेताओं ने एकता का संदेश देने की कोशिश की हो, लेकिन मांझी का बयान यह इशारा जरूर कर गया कि बिहार की राजनीति में सबकुछ उतना सरल नहीं जितना दिखता है। अब देखना यह होगा कि क्या NDA इस चुनावी एकजुटता को मतदान तक बनाए रख पाता है या सीट बंटवारे की यह खटास चुनावी समीकरणों को बदल देगी।
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