
Bihar Election 2025: बिहार की राजनीति में इन दिनों सियासी सरगर्मी अपने चरम पर है। चुनावी मैदान में जहां नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में जुटे हैं, वहीं अब एक के बाद एक उम्मीदवारों की गिरफ्तारी से माहौल और गरमा गया है। सीपीआई-माले (CPI-ML) के दो नेताओं की गिरफ्तारी के बाद अब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के एक उम्मीदवार को भी पुलिस ने नामांकन के दिन ही गिरफ्तार कर लिया।
कौन हैं गिरफ्तार उम्मीदवार?
गिरफ्तार किए गए नेता का नाम सतेंद्र साह है, जो सासाराम सीट से आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। सोमवार को जब वे नामांकन दाखिल करने पहुंचे, तभी पुलिस भी सर्किल ऑफिस में पहुंच गई। पुलिस ने उन्हें पहले नामांकन करने दिया, ताकि औपचारिकता पूरी हो सके, और जैसे ही उन्होंने पर्चा जमा किया — उसी वक्त उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
क्यों हुई गिरफ्तारी — 21 साल पुराना केस!
पुलिस के अनुसार, साल 2004 में झारखंड के गढ़वा जिले के चिरौंजिया मोड़ पर एक बैंक डकैती हुई थी। इस केस में सतेंद्र साह आरोपी थे और उनके खिलाफ 2018 में गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। गढ़वा सदर थाना प्रभारी सुनील तिवारी ने बताया कि सतेंद्र साह पर डकैती, लूट और आर्म्स एक्ट उल्लंघन के करीब 20 से ज्यादा केस दर्ज हैं। रोहतास जिले की करगहर थाना पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और बाद में उन्हें गढ़वा कोर्ट में पेश किया गया।
समर्थकों को नहीं थी भनक
सतेंद्र साह की गिरफ्तारी से उनके समर्थक हैरान रह गए। कई समर्थकों को तो पता ही नहीं चला कि नामांकन के कुछ मिनटों बाद ही उनका नेता गिरफ्तार हो गया है। जानकारी मिलते ही पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई और कई जगह विरोध की चर्चा शुरू हो गई।
यह विपक्ष के तीसरे नेता की गिरफ्तारी
सतेंद्र साह विपक्षी INDIA गठबंधन (INDIA bloc) के तीसरे उम्मीदवार हैं जिन्हें नामांकन के बाद गिरफ्तार किया गया है।
इससे पहले CPI(ML) के दो उम्मीदवार जितेंद्र पासवान (भोर सीट), सत्यदेव राम (दरौली सीट) को भी नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इन गिरफ्तारियों के बाद से विपक्षी पार्टियाँ इसे राजनीतिक साजिश और प्रशासनिक दबाव का दुरुपयोग बता रही हैं।
CPI(ML) ने क्या कहा?
सीपीआई (एमएल) लिबरेशन ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा – हम साथी जितेंद्र पासवान और सत्यदेव राम की राजनीतिक रूप से प्रेरित गिरफ्तारियों की कड़ी निंदा करते हैं। नामांकन केंद्र के बाहर उन्हें गिरफ्तार करना लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है। यह साफ दिखाता है कि एनडीए नेताओं में डर और घबराहट है, क्योंकि जनता बदलाव चाहती है।
चुनाव कार्यक्रम और पृष्ठभूमि
- बिहार विधानसभा की कुल सीटें: 243
- पहला चरण मतदान: 6 नवंबर 2025
- दूसरा चरण मतदान: 11 नवंबर 2025
- परिणाम घोषणा: 14 नवंबर 2025
इससे पहले भी कई सीटों पर गठबंधन दलों में टिकट को लेकर खींचतान देखने को मिली थी। अब गिरफ्तारी की इन घटनाओं ने विपक्षी खेमे में बेचैनी और गुस्सा दोनों बढ़ा दिए हैं।
बिहार की राजनीति में गिरफ्तारियों का यह सिलसिला चुनावी माहौल को और तनावपूर्ण बना सकता है। विपक्ष इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बता रहा है, जबकि प्रशासन इसे “कानूनी प्रक्रिया” कह रहा है। सच्चाई चाहे जो भी हो, लेकिन चुनावी रणभूमि में हर गिरफ़्तारी अब सियासी हथियार बन चुकी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार के चुनावी नैरेटिव को पूरी तरह बदल सकता है।
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