1400 छात्रों की मौत का केस- बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना को सजा-ए-मौत

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Sheikh Hasina sentenced to death

Sheikh Hasina sentenced to death: बांग्लादेश की राजनीति में सोमवार का दिन ऐतिहासिक और सबसे नाटकीय साबित हुआ। इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला 2024 के जुलाई–अगस्त में हुए छात्र आंदोलनों के दौरान हुई व्यापक हिंसा, दमन और कथित सरकारी अत्याचारों से जुड़े मामलों में आया है। ट्रिब्यूनल ने यह सजा हसीना की गैर-हाजिरी में सुनाई और तीन दिनों के भीतर उनकी गिरफ्तारी का आदेश जारी कर दिया।

छात्र आंदोलन पर बर्बर दमन: 1,400 से अधिक मौतें

फैसले के मुताबिक 2024 में नौकरी आरक्षण नीति के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन शांतिपूर्ण था, लेकिन हसीना सरकार ने इसे बर्बरता से दबा दिया। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार इस दमन में 1,400 से ज़्यादा छात्रों और युवाओं की मौत हुई। अदालत ने कहा कि सुरक्षा बलों ने निहत्थे छात्रों पर लाइव फायरिंग की, वहीं कुछ इलाकों में हेलीकॉप्टर और ड्रोन से बम तक गिराए गए।

ट्रिब्यूनल ने हसीना को “मास्टरमाइंड” बताते हुए कहा कि उन्होंने दक्षिण ढाका के पूर्व मेयर शेख फजले नूर तपोश से फोन पर बात कर “घातक हथियारों का उपयोग करने के स्पष्ट आदेश” दिए। फैसले में यह भी सामने आया कि हसीना ने अपने सहयोगी शकील को 226 लोगों की हत्या करवाने का निर्देश दिया था, जो उनके खिलाफ मामलों में गवाह या आरोपकर्ता थे।

453 पेज का फैसला, छह भागों में पढ़ा गया

ICT की तीन सदस्यीय बेंच—जस्टिस गुलाम मुर्तजा, जस्टिस मोहम्मद शफीउल आलम महमूद और जस्टिस मोहम्मद मोहितुल हक एनाम चौधरी—ने करीब 453 पन्नों के फैसले को छह भागों में पढ़ा। इसमें कई मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों का ज़िक्र है, जिनमें हसीना सरकार पर प्रणालीगत दमन” और राजनीतिक दुश्मनी के चलते हत्याओं का आदेश देने का आरोप है।

पूर्व गृह मंत्री को भी मौत, पुलिस प्रमुख बरी

हसीना के साथ पूर्व गृह मंत्री आसदुज्जमान खान कमाल को भी मौत की सजा सुनाई गई है। हालांकि पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्लाह अल-मामुन को गवाह बन जाने के बाद राहत मिल गई। हसीना और कमाल दोनों वर्तमान में भारत में निर्वासन में रह रहे थे, जिसके चलते ट्रायल उनकी गैर-हाजिरी में हुआ।

इससे पहले हसीना को 2 जुलाई 2025 को अदालत की अवमानना में छह महीने की कैद की सजा भी गैर-हाजिरी में सुनाई गई थी।

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