
Chandauli News: पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के अलीनगर वार्ड नंबर पांच में नववर्ष का जश्न उस समय मातम में बदल गया, जब बंद कमरे में जलाई गई अंगीठी के धुएं से दम घुटने पर एक युवक की मौत हो गई, जबकि दो अन्य युवक गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। यह घटना एक बार फिर बताती है कि बंद कमरे में अंगीठी जलाना कितना खतरनाक और जानलेवा हो सकता है।
जानकारी के अनुसार, मोहल्ले के रहने वाले शाहिद, शाने अली और अल्तमश नववर्ष मनाने के बाद एक कमरे में अंगीठी जलाकर सो गए थे। ठंड से बचने के लिए जलाई गई अंगीठी से रातभर जहरीला धुआं निकलता रहा, जिससे कमरे में ऑक्सीजन की कमी हो गई। तड़के तीनों युवकों की तबीयत बिगड़ने लगी और सांस लेने में परेशानी होने लगी।
परिजनों ने जब युवकों की हालत गंभीर देखी तो उन्हें आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, डॉक्टरों ने शाहिद को मृत घोषित कर दिया, जबकि शाने अली और अल्तमश की हालत नाजुक बनी हुई है और उनका इलाज जारी है।
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल सर्दी के मौसम में ऐसे हादसे सामने आते हैं, बावजूद इसके लोग सावधानी नहीं बरतते।
बंद कमरे में अंगीठी क्यों होती है जानलेवा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बंद कमरे में अंगीठी या कोयला जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड गैस निकलती है, जो रंगहीन और गंधहीन होती है। यह गैस धीरे-धीरे शरीर में पहुंचकर ऑक्सीजन की आपूर्ति रोक देती है, जिससे व्यक्ति को पता भी नहीं चलता और उसकी जान चली जाती है। नींद की अवस्था में इसका खतरा और भी बढ़ जाता है।
ठंड से बचाव के लिए बंद कमरे में अंगीठी, कोयला या हीटर का उपयोग न करें। यदि उपयोग करना जरूरी हो तो कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें और सोते समय आग पूरी तरह बुझा दें।
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