
Chandauli News: डीडीयू जंक्शन पर तैनात रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने सतर्कता और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए शुक्रवार को एक बड़ी मानवीय सफलता हासिल की। ऑपरेशन आहट और ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत आरपीएफ टीम ने अजमेर–सियालदह एक्सप्रेस के जनरल कोच से आठ नाबालिग बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया।
आरपीएफ की टीम प्लेटफॉर्म संख्या आठ पर खड़ी अजमेर–सियालदह एक्सप्रेस की सामान्य बोगी में नियमित जांच कर रही थी। इसी दौरान टीम को आठ संदिग्ध नाबालिग बच्चे बिना किसी अभिभावक के यात्रा करते दिखाई दिए। पूछताछ में उनकी पहचान बिहार के कैमूर जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र के छह बच्चों और पश्चिम बंगाल के साउथ परगना जिले के दो बच्चों के रूप में हुई।
प्रारंभिक पूछताछ में बिहार के छह बच्चों ने बताया कि वे आपस में योजना बनाकर अपने परिजनों को बिना बताए रोजगार की तलाश में जयपुर जा रहे थे। वहीं पश्चिम बंगाल के दो बच्चों ने बताया कि वे पारिवारिक नाराजगी के चलते घर से निकलकर अजमेर में काम करने का इरादा रखते थे।
आरपीएफ टीम ने तत्परता दिखाते हुए सभी नाबालिगों को ट्रेन से सुरक्षित उतारकर आरपीएफ पोस्ट डीडीयू जंक्शन लाया। यहां चाइल्ड लाइन की टीम की मौजूदगी में बच्चों की काउंसलिंग कराई गई। इसके बाद आगे की देखरेख और संरक्षण के लिए सभी बच्चों को विधिवत रूप से चाइल्ड लाइन को सौंप दिया गया।
इस सराहनीय रेस्क्यू अभियान में आरपीएफ टीम की अर्चना मीणा, अश्वनी कुमार, शाहिद खान, सतीश सिंह, अशोक यादव, चंदा गुप्ता और सीमा यादव की अहम भूमिका रही। आरपीएफ की इस कार्रवाई को बाल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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