Army Chief का ऐलान: ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है, ब्रह्मोस-ड्रोन और स्वदेशी गोला-बारूद तैयार

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Army Chief Operation Sindoor Statement

Army Chief Operation Sindoor Statement: थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन सिंदूर लगातार जारी है और देश की सुरक्षा को चुनौती देने वाली हर दुश्मन चाल का कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा और एलओसी के पास अब भी आठ आतंकी कैंप सक्रिय हैं, जिन पर भारतीय सेना की पैनी नजर बनी हुई है।

आर्मी डे (15 जनवरी) से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना पूरी तरह तैयार है और आवश्यकता पड़ने पर जमीनी हमलों के लिए भी सैनिकों की तैनाती कर दी गई है। उन्होंने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सेना की कार्रवाई में कोई ढील नहीं दी जाएगी।

2025 में आतंकवाद पर करारा प्रहार

जनरल द्विवेदी ने बताया कि वर्ष 2025 में 31 आतंकवादियों को मार गिराया गया, जिनमें से करीब 65 प्रतिशत पाकिस्तानी मूल के थे। इनमें पहलगाम आतंकी हमले के तीन हमलावर भी शामिल हैं, जिन्हें ऑपरेशन महादेव के तहत ढेर किया गया। उन्होंने कहा कि घाटी में स्थानीय आतंकवाद लगभग खत्म होने की स्थिति में है और आतंकवादी भर्ती न के बराबर रह गई है। 2025 में केवल दो नई भर्तियां दर्ज की गईं।

चीन और LAC को लेकर स्थिति स्पष्ट

चीन को लेकर सेना प्रमुख ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन इस पर लगातार सतर्क नजर बनाए रखने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत शक्सगाम घाटी को लेकर पाकिस्तान-चीन के 1963 के समझौते को अवैध मानता है और उस क्षेत्र में किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं करता।

मणिपुर और पूर्वोत्तर में सुधार

जनरल द्विवेदी ने बताया कि मणिपुर में स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है और सुरक्षा बलों व सरकार के समन्वित प्रयासों से हालात स्थिर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि म्यांमार में चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारत और म्यांमार की सेनाओं के बीच सहयोग और मजबूत होगा। कुल मिलाकर पूर्वोत्तर भारत में सुरक्षा स्थिति पहले से बेहतर हुई है।

आधुनिकीकरण पर सेना का फोकस

सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना अब तेजी से आधुनिकीकरण की ओर बढ़ रही है। जल्द ही सेना को एडवांस ब्रह्मोस मिसाइल, अधिक क्षमता वाले ड्रोन और लॉयटरिंग म्यूनिशन (घूमने वाली मिसाइलें) मिलने वाली हैं। उन्होंने बताया कि 90 प्रतिशत से अधिक गोला-बारूद अब स्वदेशी रूप से तैयार किया जा रहा है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।

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