
Basant Panchami 2026: जानिए पूजा का सही समय, शुभ योग और विशेष लाभ ज्ञान, विद्या, बुद्धि और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा शुक्रवार, 23 जनवरी को पूरे श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाई जाएगी। बसंत पंचमी के इस पावन अवसर पर स्कूलों, कॉलेजों, शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ घरों, मोहल्लों और छात्रावासों में मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं। शहर भर में पंडालों की साज-सज्जा और तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।
इस वर्ष बसंत पंचमी अत्यंत शुभ संयोगों के साथ आ रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 23 जनवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, शिव योग और महासिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य पं. शरद चंद मिश्र ने बताया कि इन योगों में मां सरस्वती की उपासना विशेष रूप से शुभ फलदायी होती है। इससे विद्या प्राप्ति, करियर में उन्नति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
पंचांग के अनुसार प्रमुख विवरण:
- सूर्योदय: प्रातः 6 बजकर 38 मिनट
- माघ शुक्ल पंचमी तिथि: पूरे दिन प्रभावी, रात्रि 12 बजकर 8 मिनट तक
- सर्वार्थ सिद्धि योग: पूरे दिन और रात्रि पर्यंत
- महासिद्धि योग: प्रातः 9 बजकर 14 मिनट के बाद शुरू
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्वाह्न में पंचमी तिथि होने पर ही बसंत पंचमी मनाई जाती है। यह पर्व ऋतुराज बसंत के आगमन का प्रतीक है और इसे श्री पंचमी भी कहा जाता है।
सरस्वती पूजा के शुभ मुहूर्त:
वसंत पंचमी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी (गुरुवार) की रात 1:30 बजे से होकर 23 जनवरी की रात 12:22 बजे तक रहेगी। उदय तिथि के आधार पर पूजा शुक्रवार को ही की जाएगी। पूजा के लिए तीन विशेष शुभ मुहूर्त हैं:
- पहला मुहूर्त: सुबह 7:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 बजे से 12:54 बजे तक
- अमृतकाल मुहूर्त: सुबह 9:31 बजे से 11:05 बजे तक
इन मुहूर्तों में मां सरस्वती की आराधना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दिन पीले वस्त्र पहनना, केसरिया भोग लगाना और किताबों-लिखने की वस्तुओं की पूजा करना शुभ होता है।
बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की कृपा से विद्यार्थियों, कलाकारों और ज्ञान प्राप्ति की कामना करने वालों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। भक्तगण इस अवसर पर मां को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करेंगे।
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