गणतंत्र दिवस पर दुनिया ने देखी भारत की शक्ति, ऑपरेशन सिंदूर बना परेड का मुख्य आकर्षण

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Republic Day 2026

Republic Day 2026: भारत ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर भव्य सैन्य परेड के साथ राष्ट्रीय पर्व मनाया। इस अवसर पर भारत की सैन्य शक्ति, स्वदेशी रक्षा तकनीक और राष्ट्रीय गौरव का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ परेड की समीक्षा की। राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दी गई।

ऑपरेशन सिंदूर बना परेड का मुख्य आकर्षण

परेड में ऑपरेशन सिंदूर की झांकी विशेष आकर्षण रही, जिसमें 1965, 1971 और 1999 के युद्धों में प्रयुक्त सैन्य संसाधनों के साथ इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल कमांड सिस्टम का प्रदर्शन किया गया। इस झांकी ने थलसेना, नौसेना और वायुसेना के समन्वय और संयुक्त शक्ति को दर्शाया।

स्वदेशी हथियार प्रणालियों का दमदार प्रदर्शन

स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के अंतर्गत सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर, धनुष गन सिस्टम, ATAGS, शक्तिबान, दिव्यास्त्र, हाई मोबिलिटी व्हीकल (HMV 6×6) और सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम ने दर्शकों का ध्यान खींचा।

हेलीकॉप्टर और बख्तरबंद वाहनों की झलक

हेलीकॉप्टर ध्रुव के जरिए प्रहार फॉर्मेशन का शानदार प्रदर्शन किया गया, जिसकी अगुवाई कर्नल विजय प्रताप ने की। परेड में 61 कैवलरी बैटल एरे वर्दी में शामिल हुई। इसके साथ ही भारत का पहला स्वदेशी बख्तरबंद लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल और हाई मोबिलिटी रिकोनिसेंस व्हीकल भी प्रदर्शित किया गया।

वीरता पुरस्कारों से सजे वीर

राष्ट्रपति मुर्मू ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया। वह अंतरिक्ष यात्री के रूप में यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय बने। इसके अलावा परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव (सेवानिवृत्त) और सूबेदार मेजर संजय कुमार सहित अन्य वीरों को सम्मानित किया गया।

प्रधानमंत्री ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। परेड की कमान लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार ने संभाली, जबकि मेजर जनरल नवराज ढिल्लों सेकंड-इन-कमांड रहे।

राष्ट्रपति ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह पर्व हमें अतीत, वर्तमान और भविष्य पर विचार करने का अवसर देता है। उन्होंने वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए इसे भारत माता की आराधना बताया।

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