
Chandauli News: चंदौली में सरकारी, सार्वजनिक और ग्रामसभा की भूमि से जुड़े मामलों में बड़ी प्रशासनिक गड़बड़ी सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ है कि कुछ अधिकारियों ने अवैध कब्जा हटाने के बजाय कब्जेदारों को लाभ पहुंचाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने तीन PCS अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
निलंबित किए गए अधिकारियों में तत्कालीन तहसीलदार सतीश कुमार (वर्तमान में SDM एटा), विराग पांडेय (SDM गाजियाबाद) और लालता प्रसाद (SDM बुलंदशहर) शामिल हैं। इन पर सार्वजनिक, आरक्षित और ग्रामसभा भूमि को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप हैं।
जिलाधिकारी की जांच में हुआ खुलासा
चंदौली के जिलाधिकारी द्वारा पं. दीन दयाल उपाध्याय नगर तहसील की पत्रावलियों के निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि कई मामलों में पहले से पारित बेदखली आदेशों के बावजूद वसूली नोटिस वापस ले लिए गए। इससे अवैध कब्जेदारों को कार्रवाई से बचा लिया गया।
जांच में शामिल भूमि में खलिहान, चकमार्ग, कब्रिस्तान, नवीन परती, बंजर और लोक उपयोगिता से जुड़ी जमीनें शामिल हैं, जिन्हें संरक्षित किया जाना था।
तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई, जिसमें एडीएम (न्यायिक), एसडीएम चकिया और अपर एसडीएम चंदौली शामिल थे। समिति की विस्तृत जांच में यह स्पष्ट हुआ कि तत्कालीन तहसीलदारों ने पीठासीन अधिकारी के रूप में अतिक्रमणकारियों के पक्ष में आदेश पारित किए, जिससे सार्वजनिक संपत्ति को भारी क्षति पहुंची।
विभागीय जांच के आदेश
प्रमुख सचिव नियुक्ति एम. देवराज द्वारा जारी आदेश में तीनों PCS अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक जांच शुरू की गई है। वाराणसी मंडलायुक्त को जांच अधिकारी नामित किया गया है, जबकि पं. दीन दयाल उपाध्याय नगर के तहसीलदार को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाया गया है। आरोप पत्र अलग से जारी किए जाएंगे। निलंबन अवधि के दौरान तीनों अधिकारी राजस्व परिषद, लखनऊ से संबद्ध रहेंगे।
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