
Chandauli News: चंदौली के साहूपुरी स्थित प्राचीन वेदव्यास महादेव मंदिर में रविवार को महाशिवरात्रि का पर्व गहरी आस्था, श्रद्धा और अनुशासन के साथ मनाया गया। ब्रह्ममुहूर्त से ही मंदिर परिसर और संपर्क मार्गों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष के बीच शिवभक्त गंगाजल, बेलपत्र और धतूरा लेकर बाबा के जलाभिषेक के लिए पहुंचे। दूर-दराज के गांवों और पड़ोसी जिलों से भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से पूरे क्षेत्र में दिनभर धार्मिक उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
महाशिवरात्रि के अवसर पर महान ऋषि वेदव्यास की तपोभूमि माने जाने वाले इस प्राचीन शिवालय में विशेष पूजन और रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने व्यास शिवलिंग पर जल अर्पित कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिन यहां जलाभिषेक करने से मानसिक कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। मंदिर प्रशासन के अनुसार सुबह से देर शाम तक दर्शन का सिलसिला लगातार जारी रहा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी विश्वनाथ के दर्शन के बाद वेदव्यास महादेव मंदिर में शीश नवाना काशी यात्रा की पूर्णता माना जाता है। इसी परंपरा के चलते वाराणसी और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु साहूपुरी पहुंचे। कई भक्तों ने बताया कि वे रातभर पैदल चलकर मंदिर पहुंचे और बाबा के दर्शन के बाद उन्हें अद्भुत मानसिक शांति का अनुभव हुआ। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है, जिसके कारण महाशिवरात्रि पर यहां भीड़ कई गुना बढ़ जाती है।
इस मंदिर की एक विशेष पहचान यह भी है कि यहां भगवान शिव के साथ नंदी की प्रतिमा स्थापित नहीं है। मान्यता है कि यह स्थान तप और साधना की भूमि है, जहां शिव तपस्वी स्वरूप में विराजमान हैं। इस अनोखी परंपरा के कारण श्रद्धालुओं में इस मंदिर के प्रति विशेष आस्था है और वे बार-बार यहां दर्शन के लिए आते हैं।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण मंदिर परिसर और आसपास के मार्गों पर दबाव की स्थिति भी बनी रही। कई भक्तों को दर्शन के लिए दो से तीन घंटे तक कतार में इंतजार करना पड़ा। हालांकि स्थानीय स्वयंसेवकों और युवाओं ने जल वितरण और कतार व्यवस्था संभालकर श्रद्धालुओं की मदद की। मंदिर प्रशासन के अनुसार सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा, जिससे पूरे आयोजन के दौरान व्यवस्था सुचारू बनी रही।
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