
UPI AutoPay: देश में डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यूपीआई ऑटोपे को लेकर शिकायतों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। कई उपयोगकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उनके बैंक खातों से बिना स्पष्ट अनुमति के स्वतः भुगतान (मैंडेट) के जरिए रकम कट रही है और इसे रद्द करना भी आसान नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंकिंग नियामक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से पूरी व्यवस्था की समीक्षा करने और जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
उपयोगकर्ताओं की शिकायतों में मुख्य रूप से तीन समस्याएं सामने आई हैं। पहली, ऑटोपे की अनुमति देते समय शर्तें स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देतीं। दूसरी, ऐप पर सक्रिय मैडेट की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं होती। तीसरी, सब्सक्रिप्शन या ऑटोपे को रद्द करने की प्रक्रिया जटिल है। कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें लगा कि यूपीआई ऐप डिलीट कर देने से भुगतान रुक जाएगा, लेकिन चूंकि मैडेट बैंक स्तर पर सक्रिय रहता है, इसलिए रकम कटती रही। कई उपभोक्ताओं ने यह भी बताया कि खाते से राशि कटने की सूचना एसएमएस के जरिए नहीं मिली।
गौरतलब है कि यूपीआई ऑटोपे सुविधा वर्ष 2020 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य सब्सक्रिप्शन, बिजली-पानी के बिल, बीमा प्रीमियम और ईएमआई जैसे नियमित भुगतानों को स्वचालित बनाना था। हालांकि हाल के महीनों में साइबर क्राइम विभाग और बैंकों के पास ऐसी शिकायतें बढ़ी हैं कि कुछ मामलों में एक बार भुगतान करने के बाद ऑटोपे मैडेट स्वतः सक्रिय हो गया या उपयोगकर्ता को यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि वह पूर्व-स्वीकृति दे रहा है।
RBI चाहता है कि ऑटोपे से जुड़े सभी भुगतान पूरी पारदर्शिता के साथ हों और उपयोगकर्ताओं की स्पष्ट सहमति ली जाए। नियामक ने यह भी संकेत दिया है कि यदि किसी खाते से बिना जानकारी राशि कटती है तो उसे आसानी से रोका या रद्द किया जा सके। डिजिटल भुगतान प्रणाली में विश्वास बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में यूपीआई ऑटोपे लेनदेन में दोगुनी वृद्धि हुई है। नवंबर 2025 में शीर्ष 10 बैंकों ने 92 करोड़ से अधिक ऑटोपे लेनदेन प्रोसेस किए। वर्तमान में हर महीने लगभग एक अरब ऑटोपे ट्रांजैक्शन हो रहे हैं, जो कुल यूपीआई लेनदेन का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में हो रहे ट्रांजैक्शन के बीच पारदर्शिता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
यदि किसी उपभोक्ता के खाते से बिना जानकारी राशि कट गई हो तो उसे तुरंत अपने बैंक या यूपीआई ऐप के कस्टमर सपोर्ट में शिकायत दर्ज करनी चाहिए। ऐप में उपलब्ध “विवाद दर्ज करें” विकल्प का उपयोग किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर NPCI के सहायता केंद्र या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
ऑटोपे या मैडेट बंद करने के लिए उपयोगकर्ता को अपने यूपीआई ऐप की प्रोफाइल या सेटिंग्स में जाकर “ऑटो-पे/मैंडेट” विकल्प चुनना होगा। वहां सक्रिय मैडेट की सूची दिखाई देगी, जिसमें संबंधित सेवा को चुनकर “रद्द करें” या “निरस्त करें” विकल्प दबाकर यूपीआई पिन के जरिए पुष्टि करनी होती है। पुष्टि के बाद मैडेट समाप्त हो जाता है।
डिजिटल भुगतान के तेजी से विस्तार के इस दौर में यह मामला उपभोक्ता सुरक्षा और पारदर्शिता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि NPCI की समीक्षा रिपोर्ट के बाद RBI क्या ठोस कदम उठाता है।
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