Stock Market Crash: मिडिल ईस्ट तनाव का असर, शेयर बाजार में 3% गिरावट, तेल के दाम…

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Stock Market Crash

Stock Market Crash: US-इजराइल-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। मिडिल ईस्ट में हालिया हमलों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली।

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन BSE Sensex 2743 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 78,543.73 पर खुला। वहीं Nifty 50 274.81 अंक टूटकर 24,903.85 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स लगभग 3% तक लुढ़क गया, जिससे निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट दर्ज की गई।

युद्ध की आंच से ग्लोबल सेंटिमेंट कमजोर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष, मिसाइल हमलों और ईरान में शीर्ष नेतृत्व को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता ने वैश्विक बाजारों में घबराहट फैला दी है। वीकेंड पर हुए हमलों के बाद निवेशकों ने इक्विटी बाजार से पैसा निकालकर गोल्ड और डॉलर जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया।

ग्लोबल संकेत कमजोर रहने के कारण एशियाई बाजारों में भी गिरावट का माहौल बना रहा, जिसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर पड़ा।

कच्चे तेल में जबरदस्त उछाल

तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। Brent Crude फ्यूचर्स 7% से ज्यादा बढ़कर लगभग 82.40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो पिछले 14 महीनों का उच्चतम स्तर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, जिससे वैश्विक महंगाई पर दबाव बढ़ेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट की आशंका

तेहरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में नेविगेशन रोकने के संकेत ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। Strait of Hormuz से दुनिया के लगभग 20% तेल की आपूर्ति होती है, जबकि भारत का 40% से अधिक कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर आता है।

यदि यह मार्ग बाधित होता है तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयात बिल पर सीधा असर पड़ सकता है। तेल रिफाइनर और सरकारें अब अपने स्टॉक स्तर की समीक्षा कर रही हैं।

निवेशकों में घबराहट, आगे क्या?

विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में मौजूदा गिरावट मुख्यतः भू-राजनीतिक जोखिमों से प्रेरित है। यदि हालात स्थिर होते हैं तो रिकवरी संभव है, लेकिन फिलहाल अस्थिरता बनी रह सकती है।

तेल की कीमतों में लगातार तेजी से महंगाई, चालू खाता घाटा और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीतिक प्रयास और क्षेत्रीय हालात बाजार की दिशा तय करेंगे।

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