
Bihar Rajya Sabha Election 2026: बिहार में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। खासकर पांचवीं सीट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। इस सीट पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन के बीच राजनीतिक गणित दिलचस्प हो गया है।
एक सीट जीतने के लिए चाहिए 41 विधायक
बिहार विधानसभा के मौजूदा गणित के अनुसार राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। राज्य की कुल 243 सदस्यीय विधानसभा में प्रभावी संख्या लगभग 202 विधायकों की मानी जा रही है।
इस समीकरण के आधार पर NDA की चार सीटें लगभग तय मानी जा रही हैं। लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि NDA की नजर अब पांचवीं सीट पर भी है।
पांचवीं सीट पर NDA की रणनीति
सूत्रों के मुताबिक NDA ने इस सीट पर उपेंद्र कुशवाहा को मैदान में उतारकर नया सियासी समीकरण तैयार किया है। इससे महागठबंधन और खासकर RJD उम्मीदवार अमरेंद्रधारी सिंह की राह मुश्किल होती दिख रही है।
बताया जा रहा है कि इस सीट के लिए जरूरी आंकड़ा हासिल करने के लिए जहां NDA को करीब 3 अतिरिक्त विधायकों की जरूरत है, वहीं RJD को करीब 6 विधायकों का समर्थन चाहिए।
ओवैसी और BSP विधायक बन सकते हैं ‘किंगमेकर’
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के पांच विधायक और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के एक विधायक अहम भूमिका निभा सकते हैं।
माना जा रहा है कि इन विधायकों का समर्थन जिस पक्ष को मिलेगा, वही पांचवीं सीट के समीकरण को तय कर सकता है।
10 साल बाद होगी वोटिंग
बिहार में करीब 10 साल बाद राज्यसभा सीटों के लिए मतदान होने की संभावना है। इससे पहले अक्सर राजनीतिक दल आपसी सहमति से उम्मीदवार तय कर लेते थे और चुनाव निर्विरोध हो जाता था।
इस बार हालांकि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज है और इसे तेजस्वी यादव की राजनीतिक साख की बड़ी परीक्षा भी माना जा रहा है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर विपक्ष जरूरी समर्थन नहीं जुटा पाया तो NDA सभी पांच सीटों पर जीत हासिल कर सकता है।
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