
Chandauli News: चकिया क्षेत्र के लतीफशाह में मजार के पास बने बाबा बनवारी दास के मंदिर के जीर्णोद्धार के दौरान मिली खंडित प्रतिमा को लेकर मंथन शुरू हो गया है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर स्वतंत्र कुमार सिंह के अनुसार लतीफशाह के पास बनवारी दास मंदिर में मिली खंडित प्रतिमा आठवीं शताब्दी के आसपास की है।
उन्होंने बताया कि बलुआ पत्थर पर उकेरी गई प्रतिमा सूर्य देव की है। प्रतिमा के दोनों हाथ में कमल नाल (डंठल सहित कमल का फूल), कमर के कटिबंध में गुप्त और परावर्ती गुप्त काल के वस्त्र, दोनों कानों में कुंडल मौजूद हैं। इसके अलावा प्रतिमा की बाईं तरफ दंड लिया व्यक्ति और बाएं तरफ कलम और स्याही लिए पिंगल (लेखाकार) विराजमान हैं। जो गुप्तकाल में उत्तर भारत की सूर्य देव की प्रतिमा को पूर्ण रूप से परिलक्षित करता है।
उन्होंने बताया कि यह खंडित प्रतिमा और उसका पत्थर किसी प्राचीन मंदिर का हिस्सा रहा होगा। मंदिर के पुजारी अवधेश ने बताया कि आसपास के ग्रामीण और संभ्रांत लोगों के सहयोग से बाबा बनवारी दास के मंदिर का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है।
बीते रविवार को मंदिर के पिछले हिस्से में बारिश के दौरान मिट्टी हटने से तलहटी में एक विशाल पत्थर का टुकड़ा मिला। पत्थर को जब हटाया गया तो उसके एक तरफ एक खंडित प्रतिमा उकेरी हुई मिली थी। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी मंदिर में खुदाई के दौरान कई प्रतिमाएं मिल चुकी हैं।
प्रतिमा भगवान विष्णु या सूर्य देव की बताई जा रही है। मंगलवार को मौके पर पहुंचे मंदिर पहुंचे एसडीएम विनय मिश्र ने पुलिस की मदद से पत्थर की प्रतिमा को चकिया में हनुमान मंदिर के पास सुरक्षित रखवा दिया है।
वहीं बनवारी दास के मंदिर से जुड़े आस्थावान लोग खंडित प्रतिमा को लतीफशाह में बने मंदिर में रखवाने पर अड़े रहे। कर्मनाशा नदी के किनारे लगभग 510 वर्ष पूर्व काशी राज की ओर से स्थापित गंगा जमुनी तहजीब और एकता के प्रतीक बाबा लतीफशाह की मजार और बाबा बनवारी दास का समाधि स्थल मौजूद है।
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