Chirag Ka Chaupal: NDA में बढ़ी टेंशन! आखिर क्या है चिराग पासवान का सीक्रेट चौपाल प्लान?

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Chirag Ka Chaupal

Chirag Ka Chaupal: बिहार NDA में सीट शेयरिंग को लेकर जारी तनातनी के बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अपनी चुनावी रणनीति का नया पत्ता खोल दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि वे अब जनता से सीधे संवाद करने के लिए “चिराग का चौपाल” शुरू करेंगे। इस कार्यक्रम का मकसद न केवल पार्टी संगठन को मज़बूत करना है, बल्कि केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाना और विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम का जवाब देना भी है।

NDA के भीतर सीटों को लेकर बढ़ सकती है खींचतान

चिराग के इस कदम से एनडीए के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर नई हलचल मचने की संभावना है। जानकारों का मानना है कि अगर LJP (आर) 243 सीटों पर अपने संगठन को मजबूत कर लेती है, तो NDA के अन्य घटक दल- जैसे HAM प्रमुख जीतनराम मांझी और RLJP अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के लिए सीटों की दावेदारी मुश्किल हो सकती है।

क्यों जरूरी है संगठन की मजबूती?

चिराग पासवान का कहना है कि सांसद और विधायक आते-जाते रहते हैं, लेकिन मजबूत संगठन किसी भी पार्टी की असली ताकत होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कभी पांच सांसद वाली राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (पारस) आज कहां खड़ी है। इसलिए उनका फोकस स्पष्ट है- 243 सीटों पर संगठन मजबूत करके साथी दलों को भी चुनाव में बढ़त दिलाना।

चिराग का चौपाल- जनता से सीधा संवाद

“चिराग का चौपाल” कार्यक्रम उसी तर्ज पर होगा, जैसे राहुल गांधी का खाट पंचायत हुआ करता था। इस चौपाल में चिराग पासवान जनता से सीधे सवाल-जवाब करेंगे। बिहार की मौजूदा स्थिति और केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी देंगे। RJD के प्रचारित भ्रम और अफवाहों का जवाब देंगे। जनता की जरूरतों और सुझावों को भविष्य की योजना में शामिल करेंगे।

विपक्ष के सवाल और चिराग का जवाब

विपक्ष ने हाल ही में यह सवाल उठाया था कि क्या NDA में दरार है, क्योंकि चिराग कुछ सरकारी कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुए। इस पर चिराग ने साफ कहा-विपक्ष सिर्फ अफवाह फैलाकर मतभेद की कोशिश कर रहा है, मेरा पूरा ध्यान संगठन की मजबूती पर है।

कार्यक्रम की तारीख़ और रोडमैप जल्द

हालांकि “चिराग का चौपाल” कब से शुरू होगा, इसका आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि यह अभियान सीट शेयरिंग से पहले ही ज़ोर-शोर से चलाया जाएगा, ताकि LJP (आर) की ताकत का सीधा संदेश सहयोगियों और विपक्ष, दोनों को मिल सके।

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