Bihar Election 2025: भभुआ में किसके हाथ लगेगी जीत- जातीय समीकरण या गठबंधन की रणनीति?

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Bihar Election 2025

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का बिगुल भले ही आधिकारिक तौर पर न बजा हो, लेकिन कैमूर जिले में राजनीतिक हलचलें तेज हो चुकी हैं। खासकर भभुआ विधानसभा सीट पर इस बार चुनावी माहौल खासा गर्म है। राजनीतिक दलों ने अभी से ही प्रचार अभियान तेज कर दिया है और संभावित प्रत्याशी जनता के बीच पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

भभुआ सीट की अहमियत और समीकरण

भभुआ विधानसभा सीट कैमूर जिले की सबसे चर्चित सीटों में से एक है। यहाँ ओबीसी मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जिसमें कोइरी और कुर्मी जातियों का बड़ा प्रभाव है। इनके बाद उच्च जाति के ब्राह्मण और कायस्थ समुदाय के मतदाता इस क्षेत्र में प्रभावशाली माने जाते हैं।

भौगोलिक रूप से यह इलाका उत्तर में बक्सर और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से, जबकि दक्षिण में झारखंड के गढ़वा जिले से घिरा हुआ है। भभुआ का इतिहास भी काफी समृद्ध है—माना जाता है कि शेरशाह सूरी ने 1532 में भभुआ शहर की स्थापना की थी। यह इलाका ऐतिहासिक मुंडेश्वरी मंदिर और कैमूर पर्वत श्रृंखला की खूबसूरती के लिए भी जाना जाता है।

भभुआ विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास

  • अब तक इस सीट पर 18 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 2018 का उपचुनाव भी शामिल है।
  • कांग्रेस ने यहां 6 बार जीत दर्ज की है।
  • बीजेपी और आरजेडी ने 3-3 बार बाजी मारी है।
  • सीपीआई को यहां 2 बार जीत मिली है।
  • बसपा, एलजेपी और जनता पार्टी ने एक-एक बार इस सीट पर जीत हासिल की है।
  • हालिया चुनावों की बात करें तो, 2020 में आरजेडी के भरत बिंद ने बीजेपी की रिंकी रानी पांडे को 10,045 वोटों से हराकर कब्जा जमाया।
  • 2018 उपचुनाव में बीजेपी ने जीत हासिल की थी।
  • 2015 में बीजेपी और 2010 में एलजेपी यहां विजयी रही थी।
  • यह विधानसभा सीट सासाराम लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सासाराम सीट जीती थी।

इस बार क्यों होगा कड़ा मुकाबला?

इस बार भभुआ में मुकाबला और भी दिलचस्प हो सकता है। सीट बंटवारे का ऐलान अभी बाकी है, लेकिन संभावना है कि आरजेडी यहां से फिर चुनाव लड़ेगी और उसका सीधा मुकाबला बीजेपी से होगा।

प्रशांत किशोर (PK) की पार्टी जनसुराज मैदान में उतरकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकती है।

निर्दलीय उम्मीदवार और दलबदलू भी बड़े दलों की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।

चिराग पासवान की पार्टी, जिसने 2020 में अकेले चुनाव लड़ा था, इस बार एनडीए गठबंधन के साथ मैदान में होगी।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भभुआ में इस बार का चुनावी रण बेहद रोचक और कड़ा मुकाबला साबित होगा, जिसमें जातीय समीकरण, गठबंधन की रणनीति और नए खिलाड़ियों की मौजूदगी परिणाम तय कर सकती है।

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