
Bihar Kishanganj Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले किशनगंज सीट पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सीमांचल की इस मुस्लिम बहुल सीट को लंबे समय से कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां AIMIM और बीजेपी ने भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। ऐसे में इस बार (Bihar Kishanganj Assembly Election 2025) मुकाबला पूरी तरह से त्रिकोणीय होने के आसार हैं।
Bihar Kishanganj Assembly Election 2025
2020 का चुनावी परिणाम
2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार इजहारुल हुसैन ने कड़े मुकाबले में जीत हासिल की थी। उन्हें 61,078 वोट मिले और उन्होंने महज 1,381 वोटों से बीजेपी की स्वीटी सिंह को हराया। स्वीटी सिंह को 59,697 वोट मिले थे, जबकि AIMIM के कमरुल होदा तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें 41,904 वोट मिले।
इस चुनाव में कुल 20 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें कांग्रेस, बीजेपी, AIMIM के अलावा BSP, BMP, BLD, VIP, RUC, AIFB, RJP, LJD, SDPI समेत कई छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशी भी शामिल थे।
मतदाताओं का गणित
2020 में किशनगंज सीट पर कुल 2,83,199 मतदाता थे, जिनमें से 1,77,573 मतदाताओं ने वोट डाला। यानी मतदान प्रतिशत लगभग 62.7% रहा। मुस्लिम बहुल इलाका होने के चलते यहां का वोट बैंक हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाता रहा है।
कांग्रेस का पुराना गढ़, AIMIM की नई पैठ
आजादी के बाद से किशनगंज पर कांग्रेस का दबदबा रहा। हालांकि, 2000 के दशक में RJD ने इस सीट पर अपनी पकड़ बनाई और तस्लीमुद्दीन व अख्तरुल ईमान जैसे नेताओं ने जीत दर्ज की।
2010 और 2015 में कांग्रेस के मोहम्मद जावेद ने लगातार जीत हासिल की। 2019 में उनके सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव में AIMIM ने चौंकाते हुए कमरुल होदा को जीत दिलाई। यह AIMIM की बिहार में विधानसभा चुनावी एंट्री थी।
2025 में समीकरण
इस बार समीकरण और दिलचस्प हैं। कांग्रेस अपनी परंपरागत पकड़ बचाना चाहती है, AIMIM मुस्लिम वोटों में सेंध लगाकर खुद को विकल्प साबित करना चाहती है और बीजेपी लगातार अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश में है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किशनगंज सीट का नतीजा सीमांचल की बाकी 46 विधानसभा सीटों पर भी असर डालेगा, क्योंकि यहां की सियासत पूरे क्षेत्र का मूड सेट करती है।
निष्कर्ष
किशनगंज विधानसभा चुनाव 2025 का मुकाबला अब सिर्फ कांग्रेस और बीजेपी के बीच नहीं रहा। AIMIM की बढ़ती ताकत ने इसे त्रिकोणीय बना दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस अपनी पारंपरिक पकड़ बचा पाती है, या AIMIM और बीजेपी मिलकर इस समीकरण को पूरी तरह बदल देंगे।
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