
Bihar Chunav 2025: बिहार की राजनीति हमेशा से उतार-चढ़ाव और सियासी पलटवार के लिए जानी जाती रही है। यहां समीकरण बदलने में देर नहीं लगती। कभी एनडीए को जनता जनार्दन चुनती है तो सत्ता में महागठबंधन बैठ जाता है। वहीं जब महागठबंधन को बहुमत मिलता है, तो राजनीति करवट लेकर उन्हें विपक्ष में धकेल देती है। पिछले पांच साल (2020 से 2025) के घटनाक्रम पर नज़र डालें तो साफ दिखता है कि बिहार विधानसभा का गणित पूरी तरह बदल चुका है।
NDA बनाम महागठबंधन: दल-बदल की राजनीति
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कभी एनडीए तो कभी महागठबंधन के साथ रहते हैं। यही वजह है कि उन्हें “पलटू कुमार” की उपाधि भी मिल चुकी है। न सिर्फ नीतीश, बल्कि कई विधायक भी बार-बार पाला बदलते रहे।
ताज़ा घटनाक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गया रैली में राजद (RJD) के विधायक विभा देवी (नवादा) और प्रकाश वीर (रजौली) मंच पर दिखाई दिए। इससे राजनीतिक अटकलें तेज हो गईं कि दोनों अब एनडीए का हिस्सा बनने जा रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन इतना तय है कि RJD के दो सिपहसालार अब कमजोर पड़ गए हैं।
RJD का ग्राफ: चढ़ाव और गिरावट
2020 विधानसभा चुनाव में राजद (RJD) ने 75 सीटें जीतीं और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। उपचुनाव और दलबदल के चलते यह आंकड़ा कई बार ऊपर-नीचे हुआ।
AIMIM के 5 में से 4 विधायक RJD में शामिल हुए तो RJD का स्कोर 79 तक पहुंचा।
लोकसभा चुनाव 2024 में रामगढ़ और बेलागंज विधायक सांसद बन गए, सीटें खाली हुईं और उपचुनाव में बीजेपी ने जीत दर्ज की। इससे RJD का स्कोर 77 पर आ गया।
फ्लोर टेस्ट और बजट सत्र के दौरान प्रह्लाद यादव, चेतन आनंद, नीलम देवी, संगीता कुमारी और भरत बिंद जैसे विधायकों ने BJP का दामन थाम लिया। अब RJD 72 पर सिमट गई।
फिलहाल, तेजप्रताप यादव के निष्कासन और दो विधायकों की बगावत के बाद RJD के पास मात्र 69 विधायक बचे हैं।
BJP का बढ़ता कद
2020 चुनाव में BJP ने 74 सीटें जीती थीं। लेकिन उपचुनाव और दल-बदल की राजनीति में फायदा BJP के खाते में गया।
आज के समय में BJP के पास 80 विधायक हैं और यह बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है।
JDU और अन्य दलों का हाल
जेडीयू (JDU) 2020 में 43 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर थी, अब उसके पास 45 विधायक हैं।
कांग्रेस 2020 में 19 सीटें लेकर आई थी, लेकिन आज 17 पर सिमट गई।
छोटे दलों जैसे HAM, LJP, CPI, CPI-ML, VIP में भी विधायकों का लगातार आना-जाना जारी रहा।
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जनता रही हाशिये पर
पिछले पांच सालों में जो सबसे बड़ा नुकसान हुआ है, वह जनता का हुआ। नेताओं के पाला बदलने और गठबंधनों की राजनीति ने जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ किया। जनादेश बार-बार ठगा गया।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले माहौल गरमा चुका है। BJP संख्या बल में सबसे बड़ी पार्टी है, RJD लगातार कमजोर हो रही है, और नीतीश कुमार अपनी परंपरागत “पलटी राजनीति” के सहारे संतुलन साधने की कोशिश में हैं।
अब बड़ा सवाल यही है- क्या 2025 में जनता फिर से किसी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत देगी, या राजनीति एक बार फिर दलबदल की भेंट चढ़ जाएगी?
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