
Bihar Election 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की उल्टी गिनती शुरू होते ही सियासी हलचल चरम पर पहुंच गई है। एक ओर विपक्ष की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ सत्ता पक्ष को घेरने की कोशिश कर रही है, तो वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार पर लोगों का भरोसा कायम रहने की बात उसके मंत्री खुलकर कह रहे हैं। इसी कड़ी में राज्य के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि “बिहार की जनता नीतीश कुमार के काम पर भरोसा करती है और विकास के मुद्दे पर एक बार फिर उन्हें सत्ता सौंपेगी।”
नीतीश पर भरोसा जताया
अशोक चौधरी के बयान ने साफ संकेत दे दिया कि जदयू-भाजपा गठबंधन विपक्ष के हमलों के बावजूद “विकास और सुशासन” के एजेंडे को ही ढाल बनाएगा। उनका कहना था कि नीतीश कुमार ने बिहार में शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जो काम किया है, उस पर लोगों का अटूट विश्वास है।
वोटर अधिकार यात्रा और विवाद
इधर, विपक्ष के इंडिया गठबंधन ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व में 16 दिनों की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाली। यह यात्रा 23 जिलों और 174 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरी। विपक्ष का दावा था कि इस अभियान का मकसद चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और “वोट चोरी” के खिलाफ जनता को जागरूक करना था।
लेकिन यात्रा के दौरान दरभंगा में मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां पर की गई अभद्र टिप्पणी ने पूरे देश में राजनीतिक भूचाल ला दिया।
NDA का पलटवार – बिहार बंद का ऐलान
इस बयान को लेकर NDA ने महागठबंधन पर नैतिक और राजनीतिक दिवालियापन का आरोप लगाया। जदयू के वरिष्ठ नेता उमेश कुशवाहा ने कहा कि “पीएम मोदी और उनकी मां के खिलाफ की गई टिप्पणी सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं बल्कि हर मां-बहन का अपमान है।”
वहीं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने 4 सितंबर को सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक बिहार बंद का ऐलान किया है। बीजेपी महिला मोर्चा इस विरोध की अगुवाई करेगा। हालांकि इस दौरान आपातकालीन सेवाओं और रेल संचालन को बंद से बाहर रखा गया है।
महिला कार्ड के सहारे NDA
विशेषज्ञों का मानना है कि महिला मतदाता हमेशा से नीतीश कुमार के पक्ष में झुकाव रखते आए हैं। साइकिल योजना, आरक्षण और शराबबंदी जैसी नीतियों ने महिलाओं को सरकार से जोड़ा। अब विपक्ष के मंच से हुई महिला विरोधी टिप्पणी ने NDA को यह मौका दे दिया है कि वह महिलाओं को फिर से अपने पक्ष में मजबूत तरीके से लामबंद कर सके।
चुनावी समीकरण में नया मोड़
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह विवाद विधानसभा चुनाव के पहले बड़ा मुद्दा बन सकता है। एक ओर महागठबंधन “वोटर अधिकार” और “अनियमित चुनाव प्रक्रिया” के मुद्दे पर जनता को साधने की कोशिश कर रहा है, वहीं NDA इसे “महिला सम्मान बनाम विपक्ष का अपमान” बनाकर चुनावी मैदान में उतर चुका है।
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