Bihar Politics: यहां 68 साल में सिर्फ दो बार भाजपा का खुला खाता, क्या 2025 में फिर खिल पाएगा कमल?

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Munger Assembly Election 2025

Bihar Politics (Munger Assembly Election 2025): बिहार की राजनीति में मुंगेर विधानसभा सीट का अपना अलग ही महत्व है। 68 वर्षों के लोकतांत्रिक इतिहास में यह सीट भारतीय जनता पार्टी (BJP) को केवल दो बार ही नसीब हुई है। दिलचस्प यह है कि भाजपा ने पहली बार जनसंघ काल में 1969 में और दूसरी बार लंबी प्रतीक्षा के बाद 2020 में विजय हासिल की। अब 2025 का चुनावी रण करीब है और एक बार फिर से यहां मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है।

जनसंघ काल से भाजपा की दूसरी पारी तक

1969 में भारतीय जनसंघ के रविशचंद्र वर्मा ने पहली बार मुंगेर से जीत दर्ज की और 1972 तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद भाजपा को इस सीट से जीत के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

1995 में भाजपा ने प्रो. अजफर शमसी को उम्मीदवार बनाया, लेकिन उन्हें जनता दल के मोनाजिर हसन से लगभग पाँच हजार मतों से हार का सामना करना पड़ा।

2015 में भाजपा ने पहली बार प्रणव कुमार को टिकट दिया। उस समय राजद से पूर्व सांसद विजय कुमार विजय मैदान में थे। महागठबंधन (राजद-जदयू) की ताकत के सामने प्रणव कुमार लगभग पाँच हजार वोटों से हार गए।

2009 का उपचुनाव और भाजपा की उम्मीद

2009 में मोनाजिर हसन (जदयू विधायक) बेगूसराय से सांसद चुने गए और इस्तीफा देने के कारण मुंगेर में उपचुनाव हुआ।

इस उपचुनाव में राजद ने भाजपा के बागी नेता विश्वनाथ प्रसाद गुप्ता को टिकट दिया।

वैश्य समाज और भाजपा समर्थकों का झुकाव विश्वनाथ गुप्ता की ओर हुआ और वे चुनाव जीत गए।

हालांकि जीत राजद की झोली में गई, लेकिन इससे भाजपा को यह भरोसा मिला कि मुंगेर में उसकी जमीन अभी बची है।

2020 का ऐतिहासिक चुनाव

2020 में भाजपा ने एक बार फिर प्रणव कुमार को टिकट दिया। इस बार उन्होंने बेहद कड़े मुकाबले में राजद उम्मीदवार अविनाश कुमार विद्यार्थी को हराया।

प्रणव कुमार (भाजपा): 75,573 वोट

अविनाश विद्यार्थी (राजद): 74,329 वोट

जीत का अंतर: सिर्फ 1,244 वोट

यह नजदीकी जीत भाजपा के लिए ऐतिहासिक रही और पार्टी ने 48 साल बाद इस सीट पर कमबैक किया।

2025 का चुनावी समीकरण

  • 2025 का चुनाव मुंगेर में बेहद रोचक रहने वाला है।
  • भाजपा एक बार फिर प्रणव कुमार पर दांव लगा सकती है।
  • राजद और महागठबंधन इस सीट को वापस लेने की पूरी कोशिश करेंगे।
  • पिछले दो चुनावों (2015 और 2020) के नजदीकी नतीजे बताते हैं कि मुंगेर की जनता हर बार नए समीकरण गढ़ती है।
  • जातीय गणित, स्थानीय मुद्दे और एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन की जंग यहां निर्णायक भूमिका निभाने वाली है।

मुंगेर विधानसभा सीट का इतिहास गवाह है कि यहां सत्ता पाना आसान नहीं है। भाजपा ने दो बार जीत हासिल की है और दोनों बार लंबा इंतजार करना पड़ा। अब देखना यह है कि 2025 में प्रणव कुमार और भाजपा अपनी पकड़ बरकरार रख पाएंगे या राजद एक बार फिर वापसी करेगी।

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