
Harnaut Assembly Seat 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। नेताओं की बैठकों का दौर जारी है और सभी दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। बिहार की वीआईपी सीटों में गिनी जाने वाली हरनौत विधानसभा सीट पर भी इस बार कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। यह सीट नालंदा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और सामान्य श्रेणी की है।
जेडीयू का गढ़, लेकिन समीकरण बदल सकते हैं
हरनौत विधानसभा सीट को अब तक जेडीयू का गढ़ माना जाता रहा है। पिछले तीन चुनावों में यहां से जेडीयू के हरि नारायण सिंह ने लगातार जीत दर्ज कर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है। जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दे इस सीट पर हमेशा निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इस बार भी बेरोजगारी, शिक्षा, सड़क और बुनियादी ढांचे का विकास यहां का प्रमुख चुनावी मुद्दा होगा।
जातीय गणित: कौन है किंगमेकर?
- हरनौत विधानसभा सीट ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्र का मिश्रण है।
- कुर्मी मतदाता – जेडीयू का मजबूत आधार (नीतीश कुमार का प्रभाव)।
- यादव मतदाता – राजद का परंपरागत वोट बैंक।
- दलित और महादलित मतदाता – दोनों गठबंधनों के लिए निर्णायक।
- सवर्ण मतदाता (भूमिहार, ब्राह्मण) – बीजेपी की ओर झुकाव।
- यहां (Harnaut Assembly Seat 2025) कुर्मी और यादव मतदाता किंगमेकर साबित होते हैं। वहीं दलित और महादलित वोटबैंक भी चुनावी नतीजों को पलटने की ताकत रखते हैं।
हरि नारायण सिंह की जीत की हैट्रिक
- 2020 चुनाव: हरि नारायण सिंह (जेडीयू) – 65,404 वोट, लोजपा की ममता देवी को हराया।
- 2015 चुनाव: हरि नारायण सिंह ने लोजपा उम्मीदवार अरुण कुमार को 14,295 वोटों से हराया।
- 2010 चुनाव: हरि नारायण सिंह को 56,827 वोट, अरुण कुमार (लोजपा) को शिकस्त दी।
- लगातार तीन बार की जीत ने हरनौत सीट पर जेडीयू की पकड़ और मजबूत कर दी है।
2025 में क्यों रोचक होगा मुकाबला?
इस बार हरनौत सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है क्योंकि—
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के उभार ने चुनावी माहौल गरमा दिया है। राजद और कांग्रेस की रणनीति OBC और मुस्लिम वोटरों पर टिकी है। बीजेपी सवर्ण और शहरी वोटरों को साधने में लगी है। ऐसे में देखना होगा कि क्या जेडीयू का गढ़ कायम रहेगा या फिर नया समीकरण इस सीट पर इतिहास रचेगा।