
Devuthani Ekadashi 2025: चार माह की योगनिद्रा के बाद भगवान श्रीहरि विष्णु के जागरण का पावन पर्व देवउठनी एकादशी (हरी प्रबोधिनी एकादशी) इस बार शनिवार को पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। इस शुभ अवसर पर भगवान विष्णु के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भव्य श्रृंगार और दीप सजावट की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। शुक्रवार से ही मंदिरों में दीप, पुष्प और झालरों से सजावट का कार्य शुरू हो गया था।
इस दिन भक्तजन व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करेंगे और ‘उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविंद, त्यज निद्रां जगत्पते…’ मंत्रोच्चारण के साथ श्रीहरि को जगाएंगे। माना जाता है कि चातुर्मास की चार माह की अवधि समाप्त होने के बाद देवउठनी एकादशी से ही विवाह, गृहप्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत की जाती है।
भद्रा के कारण रविवार को होगा तुलसी विवाह
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार, कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि शनिवार की भोर 4:08 बजे से आरंभ होकर रात 2:42 बजे तक रहेगी। दोपहर बाद 3:26 बजे से भद्रा लगने के कारण एकादशी के दिन तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त टल जाएगा।
उन्होंने बताया कि तुलसी विवाह का आयोजन रविवार को द्वादशी तिथि में दोपहर 2:25 बजे के बाद उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में किया जाएगा, जो शास्त्रीय दृष्टि से सर्वोत्तम समय होगा।
बिंदु माधव मंदिर में पांच दिवसीय श्रृंगारोत्सव
पंचगंगा घाट स्थित बिंदु माधव मंदिर, जिसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्थापित किया था, में इस अवसर पर पांच दिवसीय श्रृंगारोत्सव मनाया जाएगा। प्रधान अर्चक आचार्य मुरलीधर गणेश पटवर्धन ने बताया कि, एकादशी को भगवान का शेषशायी श्रृंगार, द्वादशी को तुलसी विवाह एवं अश्वारोहण श्रृंगार, त्रयोदशी को झूले पर श्रृंगार, बैकुंठ चतुर्दशी को हरिहर श्रृंगार, और पूर्णिमा को भगवान हाथी पर विराजमान श्रृंगार किया जाएगा।
श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में गूंजेगा ‘विष्णु सहस्रनाम पाठ’
देवउठनी एकादशी के पावन अवसर पर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर प्रांगण स्थित बद्रीनारायण मंदिर में दोपहर 12:30 बजे भगवान विष्णु का षोडशोपचार पूजन होगा। मंदिर न्यास के 11 ब्राह्मण सामूहिक रूप से विष्णु सहस्रनाम पाठ करेंगे। इसके बाद श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर और पद्मनाभ मंदिर में पुरुषसूक्त पाठ और आरती का आयोजन किया जाएगा।
सायं चार बजे से माता अन्नपूर्णा मंदिर परिसर में चारों वेदों का सामूहिक वैदिक पाठ किया जाएगा। इसके पश्चात शंकराचार्य चौक स्थित शिवार्चनम मंच पर भजन संध्या कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें भक्त भक्ति संगीत के माध्यम से भगवान विष्णु के जागरण का उल्लास मनाएंगे।
रविवार सुबह होगा व्रत पारण
बीएचयू ज्योतिष विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुभाष पांडेय के अनुसार, इस बार रेवती नक्षत्र न होने से द्वादशी सूर्योदय के साथ ही प्रारंभ होगी। इसलिए व्रत पारण रविवार की सुबह सूर्योदय के बाद किसी भी समय किया जा सकता है।
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