
Madvi Hidma killed: छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में दहशत का दूसरा नाम बन चुके 50 लाख के इनामी नक्सली मादवी हिडमा का आखिरकार अंत हो गया। सुरक्षा बलों ने 18 नवंबर 2025 को आंध्र प्रदेश की सीमा के पास एक बड़े ऑपरेशन में हिडमा को ढेर कर दिया। ठीक एक सप्ताह पहले उसकी बूढ़ी मां ने उसे घर लौटने की भावुक अपील की थी, पर हिडमा ने मां की बात नहीं मानी और उसका खूनी अध्याय खत्म हो गया।
हिडमा नक्सल आंदोलन का सबसे कुख्यात चेहरा था, जिस पर 26 से अधिक बड़े हमलों का मास्टरमाइंड होने का आरोप था। पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बैटालियन नंबर–1 का वह प्रमुख था और वर्षों से बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण लक्ष्य बना हुआ था।
नक्सलवाद के सबसे खूंखार हमलों का मास्टरमाइंड
हिडमा की अगुवाई में कई बड़े हमले हुए, जिनमें शामिल हैं-
• ताड़मेटला हमला (2010)
• झीरम घाटी हमला (2013)
• बुर्कापाल हमला (2017)
• अरनपुर IED विस्फोट (2023)
इन हमलों में दर्जनों जवान शहीद हुए और देश की आंतरिक सुरक्षा को गहरा झटका लगा।
सुकमा का संतोष, जो बना हिडमा
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, हिडमा का असली नाम संतोष था। सुकमा के पुवर्ती गांव में जन्मा हिडमा सिर्फ 14 साल की उम्र में ‘बाल संघम’ से जुड़ गया था और 17 साल की उम्र में सक्रिय नक्सली बन गया।
50–55 वर्ष की उम्र में वह CPI (माओवादी) की सेंट्रल ऑर्गनाइजेशन कमेटी (COC) का सबसे युवा सदस्य बन गया। बस्तर से इस समिति में शामिल होने वाला एकमात्र आदिवासी भी वही था।
उसकी शिक्षा 10वीं कक्षा तक ही सीमित थी, लेकिन वह रणनीति, सुरक्षा घेरे और गुप्तचर नेटवर्क में माहिर माना जाता था। वह 5-स्तरीय सुरक्षा घेरे में रहता था और जंगलों में ‘भूत’ की तरह अदृश्य होकर गतिविधियाँ संचालित करता था।
पत्नी भी ढेर
सुरक्षा बलों के अनुसार, ऑपरेशन में हिडमा के साथ उसकी दूसरी पत्नी राजे उर्फ राजक्का, जो PLGA बटालियन में टीचर के रूप में कार्यरत थी, वह भी मारी गई।
ऑपरेशन से ठीक पहले मां की दर्दभरी अपील
एक हफ्ते पहले छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा मोटरसाइकिल से पुवर्ती गांव पहुंचे थे और बिना हथियार, बिना वारंट हिडमा की मां से मुलाकात की। मां ने कांपती आवाज में कहा था-
‘तुम कहां हो बेटा? वापस आ जाओ। अपने लोगों के साथ रहो। हम घर पर कमाकर खा लेंगे।‘ लेकिन हिडमा नहीं लौटा, और 7 दिन बाद उसका अंत हो गया।
गृह मंत्रालय की डेडलाइन
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, गृहमंत्री अमित शाह ने सुरक्षाबलों को 30 नवंबर 2025 तक हिडमा को मार गिराने या गिरफ्तार करने की डेडलाइन दी थी। 18 नवंबर को सुरक्षा बलों ने यह सबसे बड़ी सफलता हासिल कर ली।
छत्तीसगढ़-बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के एक खूनी अध्याय का यह अंत माना जा रहा है। अब नक्सल नेतृत्व में बहुत कम बड़े कमांडर बचे हैं, और सरकार ‘पूर्ण सफाया अभियान’ के अंतिम दौर में बताई जा रही है।
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