
Varanasi News: भाजपा की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व राज्यसभा सभापति स्व. वीरेंद्र सिंह यादव की पुत्रवधु शालिनी यादव ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि सिगरा स्थित जिस फ्लैट को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, उसका वह न कभी स्वामित्व रखती थीं और न ही सह-स्वामित्व। उनके मुताबिक, कुछ राजनीतिक तत्व उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से झूठी और मनगढ़ंत बातें फैला रहे हैं।
शालिनी यादव ने कहा, “पिछले दो दिनों से मेरे नाम को गलत तरीके से जोड़कर भ्रामक खबरें वायरल की जा रही हैं। दावा किया जा रहा है कि मेरे फ्लैट में छापेमारी के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया। जबकि पुलिस रिपोर्ट साफ बताती है कि उक्त फ्लैट का स्वामित्व मेरा नहीं है, और वहां से केवल तीन महिलाओं को पूछताछ के लिए ले जाया गया, जिन्हें बाद में थाने से छोड़ दिया गया।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही खबरों के पीछे विपक्ष से जुड़े कुछ लोग और फेक आईडी के जरिए सक्रिय ट्रोल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि उनकी लीगल टीम सभी पोस्ट और खबरों की जांच कर रही है तथा मानहानि सहित IPC की संबंधित धाराओं में मुकदमा दायर किया जाएगा।
इस मामले पर अरुण यादव, शालिनी के पति, ने भी अलग प्रेस वार्ता कर अपनी स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि सिगरा स्थित शक्ति-शिखा अपार्टमेंट का फ्लैट नंबर 112 वर्ष 1996 से उनके नाम पर है और सभी शासकीय बिल भी उन्हीं के नाम पर जमा होते हैं। उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल 2025 से यह फ्लैट चंदौली निवासी अश्वनी त्रिपाठी को किराए पर दिया गया है, जिसका नोटरीकृत एग्रीमेंट भी उपलब्ध है।
अरुण यादव ने बताया कि 2 दिसंबर को पुलिस ने मेलोडी स्पा के साथ उनके किराए के फ्लैट पर भी छापेमारी की थी। स्पा से 10 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि फ्लैट से केवल तीन महिलाओं को पूछताछ के लिए ले जाया गया और बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एफआईआर में न उनका नाम है और न फ्लैट मालिक का, बावजूद इसके सोशल मीडिया पर भ्रामक तरीके से 13 लोगों की गिरफ्तारी को उनके फ्लैट से जोड़कर गलत दुष्प्रचार किया जा रहा है।
ALSO READ – Chandauli News: चकिया में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई, वन विभाग ने मिनी ट्रक पकड़ा, ड्राइवर पर FIR