
SIR Draft Voter List: निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के आंकड़े देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माने जा रहे हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की है, जिसमें करीब 6.56 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। यह कार्रवाई मतदाता सूची को त्रुटि-मुक्त और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से की गई है।
आंकड़ों के मुताबिक, हटाए गए नामों की संख्या कई छोटे देशों की कुल जनसंख्या से भी अधिक है। सबसे अधिक नाम उत्तर प्रदेश से हटाए गए हैं, जहां 2,88,74,108 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर किए गए। यह राज्य के कुल मतदाताओं का लगभग 18.70 प्रतिशत है।
इसके बाद दूसरे स्थान पर तमिलनाडु रहा, जहां 97,37,832 नाम हटाए गए। तीसरे स्थान पर गुजरात (73,73,327) और चौथे स्थान पर पश्चिम बंगाल (58,19,000) का नाम शामिल है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में नाम कटने की संख्या अधिक रही है। लखनऊ, चेन्नई, अहमदाबाद जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर शहरी पलायन, मृत्यु के बाद नाम न हटना और एक व्यक्ति का दो स्थानों पर पंजीकरण इसके प्रमुख कारण रहे। लंबे समय से मतदान न करने वाले मतदाताओं के नाम भी इस पुनरीक्षण में हटाए गए हैं।
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी मतदाता का नाम गलती से सूची से हट गया है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। 6 फरवरी 2026 तक दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया है। मतदाता Form-6 के माध्यम से अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं। यह प्रक्रिया Voter Helpline App, निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित बीएलओ (BLO) से मिलकर ऑफलाइन भी पूरी की जा सकती है।
निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया किसी को मताधिकार से वंचित करने के लिए नहीं, बल्कि साफ, सटीक और भरोसेमंद मतदाता सूची तैयार करने के उद्देश्य से की गई है।
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