
Varanasi News: देश में तेजी से बढ़ते हृदय रोगों और साइलेंट हार्ट अटैक की घटनाओं के बीच काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के रसायन विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने एक अत्याधुनिक इम्पेडिमेट्रिक सेंसर विकसित किया है, जो रक्त में सी-रिएक्टिव प्रोटीन (सीआरपी) के स्तर को बेहद सटीकता और तेजी से माप सकता है।
सीआरपी को हृदय संबंधी रोगों का प्रमुख जैविक मार्कर माना जाता है। वर्तमान जांच विधियां अक्सर समय लेने वाली और महंगी होती हैं, लेकिन यह नया नैनो-सेंसर मात्र 0.5 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर जैसे बहुत कम स्तर पर भी सीआरपी की पहचान कर सकता है। यह सामान्य से लेकर उच्च जोखिम वाले स्तर (0.5 से 400 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर) तक की जांच करने में सक्षम है और परिणाम सिर्फ 10 सेकंड में दे देता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, इस सेंसर की मुख्य विशेषता मालिक्यूलर इम्प्रिंटेड पॉलिमर (एमआईपी) और बिस्मथ-युक्त कोबाल्ट फेराइट नैनोकणों का अनोखा संयोजन है। एमआईपी को ‘आर्टिफिशियल एंटीबॉडी’ कहा जाता है, जिसे विशेष रूप से सीआरपी अणुओं को चुनिंदा तरीके से पकड़ने के लिए तैयार किया गया है। सेंसर में 4-नाइट्रोफेनिल मेथाक्रायलेट जैसे विशेष कार्यात्मक मोनोमर और क्रासलिंकर का उपयोग किया गया है। इसे इंडियम टिन ऑक्साइड (आईटीओ) इलेक्ट्रोड पर इलेक्ट्रोफोरेटिक डिपोजिशन प्रक्रिया से विकसित किया गया है।
भारत में हृदय रोग मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है। ऐसे में समय पर और सटीक जांच से कार्डियक अरेस्ट जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है। यह इलेक्ट्रोकेमिकल सेंसर बाजार में आने पर क्लिनिकों और अस्पतालों में हृदय रोगों का आकलन अधिक सुलभ, तेज और किफायती बना सकता है।
यह शोध हाल ही में यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित जर्नल ‘जर्नल ऑफ मैटेरियल्स केमिस्ट्री बी’ में प्रकाशित हुआ है। शोध टीम में रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. जय सिंह, सैम हिगिनबाटम कृषि, प्रौद्योगिकी और विज्ञान विश्वविद्यालय प्रयागराज की डॉ. नीलोत्पमा सिंह के अलावा शोधार्थी सिद्धिमा सिंह और आस्था सिंह शामिल रहे।
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